सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से पार्किंग, स्ट्रीट लाइटों की कमी, सड़क की खराब हालत, ब्लड स्टोरेज यूनिट का अभाव और अन्य बुनियादी ढांचे के बारे में अवगत कराया गया। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राज्य का इरादा इस अस्पताल को प्रीमियम संस्थान बनाने का है, लेकिन संपर्क मार्ग खस्ताहाल होने के कारण मरीजों और तीमारदारों को संस्थान तक पहुंचना ही मुश्किल हो रहा है। न्यायालय डेढ़ साल से अस्पताल में सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए भरपूर प्रयास और सहयोग कर रहा है, लेकिन कोई पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। अदालत ने न्याय मित्रों से इस पर सुझाव प्रस्तुत करने का अनुरोध किया। अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी।
न्यायालय को बताया गया कि अस्पताल तक जाने वाली सड़क की हालत दयनीय है। यह यातायात के भारी प्रवाह को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। पिछले आदेश में सड़क सुधार, सराय भवन के निर्माण, बिजली के खंभों को हटाने और तीन किलोमीटर के रास्ते पर स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश दिए गए थे। बिजली के 32 खंभों के स्थानांतरण और भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर भी आदेश दिए गए थे। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मरीजों के लिए 1,000 वाहनों और स्टाफ के लिए 400 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग सुविधा बनाने का अनुरोध 6 सितंबर 2024 को किया था, लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।
स्वास्थ्य सचिव की ओर से 24 नवंबर को हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि अस्पताल में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को 300 वाहन और बाकी दिनों में लगभग 100 वाहन आते हैं। इसके विपरीत पार्किंग की सुविधा केवल 60 वाहनों के लिए है, जो पहले से ही लगभग 70 फैकल्टी/स्टाफ के वाहनों से भरी रहती है।