छह माह पूर्व उपलब्ध करवाई गई हैं मशीनें, अभी तक फांक रही हैं धूल
मापतौल विभाग से अभी तक सत्यापित नहीं की गई है डिपुओं में लगी मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के तहत संचालित राशन डिपुओं पर लगी पॉस और वेइंग मशीनों के इंटीग्रेशन (एक दूसरे के साथ जोड़ने) के आदेश जारी किए हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से डिपोधारकों को इंटीग्रेशन के लिए यूएसबी पोर्ट (उपकरणों को कंप्यूटर से जोड़ना) हब उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। प्रदेश में वर्तमान समय में तकरीबन 5300 डिपोधारक हैं। एक यूएसबी पोर्ट की बाजार में करीब 500 रुपये कीमत है। ऐसे में यूएसबी पोर्ट अपने स्तर पर लेने के लिए डिपो धारकों को तकरीबन 26 लाख 50 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। डिपोधारकों को तकरीबन छह माह पहले नई वेइंग मशीनें मिली हैं लेकिन यूएसबी पोर्ट न होने के कारण सरकार की ओर से करोड़ों खर्च कर खरीदी गई यह मशीनें अभी तक धूल फांक रही हैं। प्रदेश डिपो संचालक समिति के प्रदेशाध्यक्ष अशोक कवि ने कहा कि पूर्व में भाजपा सरकार के समय इंटीग्रेशन के आदेश जारी किए गए थे। विभाग की ओर से डिपुओं में जो वेइंग मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं वह मापतौल विभाग से अभी तक सत्यापित नहीं है। जिस कंपनी को इंटीग्रेशन का टेंडर दिया गया था, वह अभी तक यूएसबी पोर्ट हब उपलब्ध नहीं करवा पाई है। पॉस मशीनें थ्री जी कनेक्टिविटी पर कार्य कर रही हैं। बिना यूएसबी पोर्ट के इन मशीनों की इंटीग्रेशन संभव नहीं है। प्रदेश सरकार डिपो धारकों को यूएसबी पोर्ट उपलब्ध करवाए या फोर जी कनेक्टिविटी पर कार्य करने वाली मशीनें उपलब्ध करवाई जाएं। अगर डिपो धारक अपने खर्चे पर यूएसबी पोर्ट हब लेते हैं तो ऐसे में उन पर करीब 26 लाख 50 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पहले ही डिपोधारक मशीनों की कनेक्टिविटी के लिए हर माह तकरीबन साढ़े चार सौ रुपये अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं। मशीनों में डाले सिमकार्ड अरसे से बंद पड़े हैं।
कोट
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अरविंद कुमार ने कहा कि मामला सरकार के विचाराधीन है। इस बारे में संबंधित कंपनी से बात चली है। यह मामला सरकार के स्तर का है। उच्चाधिकारियों को इस मामले में सूचित कर दिया गया है।