हमीरपुर। अपनी ही सरकार में कोई सुनवाई न होने के चलते जिला परिषद हमीरपुर की शुक्रवार को आयोजित त्रैमासिक बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। उचित सूचना के बावजूद इस बैठक में वन विभाग, स्वास्थ्य, जिला खनन विभाग समेत आधा दर्जन विभिन्न विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचे। जिले में छह विकास खंड हैं, लेकिन महज खंड विकास अधिकारी नादौन ही बैठक में आए। शेष पांच खंड विकास अधिकारी भी बैठक से अनुपस्थित रहे।
वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से सीएमओ के बजाय अधीक्षक ही बैठक में पहुंच गए। सीएमओ, डीएफओ, जिला खनि अधिकारी समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति और नकारात्मक रवैये पर जिला परिषद के सदस्यों ने गहरी नाराजगी जताई है। जिसके चलते सर्वसम्मति से इस बैठक को रद्द कर दिया गया। जिला परिषद की पूर्व में आयोजित बैठक में भी अधिकतर अधिकारी गायब रहे थे, लेकिन दूसरी बार अधिकारियों की अनुपस्थिति से जिला परिषद की बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत से अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही अधिकारियों के इस व्यवहार की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर से शिकायत करने का निर्णय लिया। बैठक में जिला परिषद सदस्य एवं भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन रणजीत सिंह, लहड़ा वार्ड से जिप सदस्य संजीव सेठी, संजय कुमार, आशीष डोगरा, दांदडू वार्ड संजीव कुमार, मीना कुमारी, रमन वर्मा, सुमना देवी समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। संजीव सेठी ने बताया कि वह कई किलोमीटर दूर से बैठक में आते हैं, जिसके बदले में सदस्यों को टीए और डीए की कोई व्यवस्था तक नहीं है। शिमला हिप्पा में भी वर्कशॉप में भाग लिया, लेकिन आज तक कोई पैसा नहीं मिला। ऊपर से बैठक में अधिकारियों के न पहुंचने से वार्डों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारी न तो अपने कार्यालय में मिलते हैं और न ही बैठकों में पहुंच रहे हैं, जोकि काफी चिंता का विषय है। वार्डों में सोलर लाइटें खराब पड़ी हैं, कोई सुध नहीं ले रहा। वन विभाग की एनओसी के बिना अधिकतर काम लटके हुए हैं।
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भाजपा समर्थित हैं अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
जिला परिषद हमीरपुर की अध्यक्ष बबली देवी और उपाध्यक्ष नरेश कुमार दर्जी समेत कुल 18 में से अधिकतर सदस्य भाजपा समर्थित हैं। प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद जिला के विभिन्न विभागों के अधिकारी जिला परिषद की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे। पूर्व में आयोजित बैठकों में जो अधिकारी अनुपस्थित रहे थे, उन्होंने अभी तक नोटिस के जवाब नहीं दिए। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह जिला की क्या हालत है।
अधिकारी ने काट दिया फोन: चेयरमैन
जिला परिषद की चेयरमैन बबली देवी ने कहा कि सभी अधिकारियों को 25 फरवरी, शुक्रवार को होने वाली त्रैमासिक बैठक की बाकायदा लिखित में सूचना दी गई थी। कुछेक अधिकारियों को उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर फोन किए। एक अधिकारी ने तो उनका फोन ही काट दिया और दोबारा फोन करने की आवश्यकता तक नहीं समझी। अधिकारियों का इस तरह का व्यवहार समझ से परे है।
कार्रवाई नहीं हुई तो सभी सदस्य सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंप देंगे
जिला परिषद की त्रैमासिक बैठक में अधिकारी नहीं पहुंचे थे। कुछेक अधिकारियों ने लिपकीय स्टाफ भेजा, वह जिला परिषद सदस्यों के सवालों का क्या जवाब देते। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री को भी शिकायत भेजी जा रही है। अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं होती है तो सभी सदस्य सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंप देंगे।