नादौन में स्वतंत्रता सेनानी इंद्रपाल की प्रतिमा के पास श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित परिवार स
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नादौन। देश की आजादी की लड़ाई में भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु सहित प्रमुख क्रांतिकारियों के साथ रहे स्वतंत्रता सेनानी इंद्रपाल के जन्मदिन पर नादौन में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करके श्रद्धांजलि दी गई। मंगलवार को सुबह शहर के इंद्रपाल चौक पर एकत्रित हुए प्रशासनिक अधिकारियों और क्रांतिकारी इंद्रपाल के परिजनों ने इंद्रपाल की प्रतिमा पर फूल मालाएं चढ़ाईं। राजस्थान से पहुंचे इंद्रपाल के पोते समीर उपाध्याय सहित दोहते पुनीत, दोहती प्रेमा, दामाद शरणागत सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे।
प्रशासन की ओर से एसडीएम विजय धीमान, तहसीलदार मनोहर लाल, नगर पंचायत प्रधान तरुण कपिल, उपप्रधान योगराज, पार्षद ऊषा सौंधी, सुषमा अवस्थी, सुमन और अनिता आदि उपस्थित रहे। स्वतंत्रता सेनानी इंद्रपाल का जन्म नादौन के वार्ड नंबर दो में पांच अप्रैल 1905 को हुआ था। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिस रेलगाड़ी से लार्ड इरविन सफर कर रहे थे, उसे बम से उड़ाने के प्रयास तथा पंजाब के छह जिलों में बम विस्फोट से शासन को उलझाने में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
उन्हें फांसी की सजा हुई, जिसे बाद में उनकी बीमारी के चलते आजीवन कारावास में बदल लिया गया, लेकिन जेल पुलिस की यातनाओं तथा लगातार भूखहड़ताल से उनकी सेहत में हो रही गिरावट के चलते 1938 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। इंद्रपाल शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विश्वासपात्रों में से एक थे। उनका देहांत 13 अप्रैल 1948 को हुआ। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में डॉ. अशोक, सुनील शर्मा, हुक्म सिंह बैंस, पवन शर्मा ने भी इंद्रपाल चौक पहुंच कर क्रांतिकारी इंद्रपाल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि दी।