तीन साल से बराड़ा प्राथमिक पाठशाला को नहीं मिली अपनी छत
संवाद न्यूज एजेंसी
भोरंज (हमीरपुर)। शिक्षा के क्षेत्र में दम भरने वाली प्रदेश सरकार के दावे उस समय खोखले साबित हो जाते हैं, जब बराड़ा प्राथमिक पाठशाला में शिक्षा का स्तर निम्न प्रतीत होता है। पाठशाला में विद्यार्थियों की संख्या तो अधिक है, लेकिन उनके भविष्य निर्माण की बागडौर एक अध्यापक के हाथ में है।
भोरंज उपमंडल के तहत बराड़ा प्राथमिक पाठशाला में पहली से पांचवीं तक की कक्षा में 107 छात्र हैं, लेकिन इन पांच कक्षाओं को पढ़ाने के लिए पाठशाला में मात्र एक जेबीटी शिक्षक तैनात है। पहले तो एक अध्यापक पांच कक्षाओं के 107 विद्यार्थियों को पढ़ाएगा। उसके उपरांत मिड-डे मील कार्य का लेखा-जोखा करने का काम करेगा। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
वहीं, अकेले अध्यापक पर कार्य का अतिरिक्त बोझ है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की कम संख्या का होना प्रशासन और सरकार के लिए चिंता का विषय रहता है। इसके विपरित बराड़ा जैसे स्कूल में छात्रों की संख्या अधिक है, वहां पर प्रशासन और सरकार अध्यापक उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। संख्या के हिसाब से बराड़ा स्कूल में चार अध्यापक और एक मुख्य अध्यापक होना चाहिए।
इस संबंधी बीईईओ भोरंज एनके नड्डा ने कहा कि रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। उन्होंने कहा कि समुचित अध्यापक न होने के कारण स्कूल में कई कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं।
अपना भवन नहीं, उच्च स्कूल में चल रही हैं कक्षाएं
हमीरपुर-मंडी एनएच निर्माण की जद में यह प्राथमिक पाठशाला आई थी। इस कारण स्कूल के छह कमरे गिरा दिए गए थे। करीब तीन साल से इस स्कूल के पास अपना कोई भवन भी नहीं है। प्राथमिक स्कूल के विद्यार्थियों को नजदीकी हाई स्कूल में बैठाया जा रहा है। यहां पर इन बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही है।