हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक से परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नलबंदी का ऑपरेशन करवाने के बावजूद एक महिला गर्भवती हो गई और उसने परिवार में चौथे बच्चे को जन्म दिया। नवजात के जन्म के बाद महिला की किन्ही कारणों से मौत भी हो गई। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए महिला के पति ने जिला कंज्यूमर फोरम में केस दर्ज करवा दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की दलीलें सुनने के बाद कंज्यूमर फोरम ने स्वास्थ्य विभाग को राहत प्रदान करते हुए मामले को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की दलीलों के बाद जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम हमीरपुर के अध्यक्ष न्यायाधीश भुवनेश गुप्ता, सदस्य सुशील शर्मा और स्नेहलता ने इस मामले में सुनवाई की है। मामला जिला हमीरपुर के नादौन उपमंडल का है। एक व्यक्ति ने उपभोक्ता संरक्षण फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसने 4 अप्रैल 1994 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नादौन में अपनी पत्नी कृष्णा देवी की नलबंदी करवाई थी। बावजूद इसके करीब 5 साल बाद 23 सितंबर 1999 को उनके घर में एक बेटी का जन्म हुआ। होशियार सिंह का आरोप था कि ऑपरेशन में कोताही के कारण उनके घर में चौथी संतान पैदा हो गई।
इसके कुछ समय के बाद उनकी पत्नी की मौत हो गई। 7 अगस्त 2018 में याचिकाकर्ता ने इस मामले में उपभोक्ता संरक्षण फोरम हमीरपुर में शिकायत दर्ज करवाई। याचिकाकर्ता ने इस मामले में सीएमओ हमीरपुर और प्रदेश स्वास्थ्य विभाग, खंड चिकित्सा अधिकारी नादौन और डॉ. आरएस धीमान को वादी बनाया था। इसके बाद सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि नलबंदी के ऑपरेशन के दौरान यह संभावना रहती है कि यह 100 फीसदी सफल न हो। स्वास्थ्य विभाग ने तर्क दिया कि लेप्रोस्कोपी अध्ययन में कई बार इस तरह के नलबंदी के ऑपरेशन असफल होने की संभावना बनी हैं।
नलबंदी के इस ऑपरेशन के दौरान मरीज और परिजनों से भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर लिए जाते हैं, जिसमें यह स्पष्ट होता है कि इस तरह के ऑपरेशन कई बार असफल भी हो जाते हैं। होशियार सिंह और उनकी पत्नी से भी इस तरह का दस्तावेज ऑपरेशन के वक्त साइन करवाया गया था। वहीं शिकायतकर्ता ने कहा कि अगर ऑपरेेशन में 100 फीसदी गारंटी नहीं तो ऐसे ऑपरेशन बंद होने चाहिए, ताकि लोगों को ठगने से बचाया जा सके।