गलोड़ (हमीरपुर)। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं पीएचसी के भवन में घुट रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 40 कमरों की आवश्यकता है, लेकिन नया भवन न मिलने के कारण केवल 14 कमरों में ही लोगों का इलाज किया जा रहा है।
वहीं, स्थान कम होने के कारण पर्ची बनवाने के लिए लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रत्येक डाॅक्टर के लिए अलग-अलग कमरों की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन सीएचसी में सभी चिकित्सक केवल एक कमरे में ही मरीजों की नब्ज देखने को मजबूर हैं।
इसके अलावा मरीजों को दाखिल करने के लिए लगभग 30 बिस्तरों की आवश्यकता है, लेकिन यहां पर केवल आठ ही बिस्तर उपलब्ध हैं। अगर कहीं अधिक मरीज हो जाएं, तो उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ेगा या फिर एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 175 से 200 के बीच ओपीडी है।
खांसी, बुखार, जुकाम और लूज मोशन के रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। एक महीने में लगभग 600 अल्ट्रासाउंड और 850-900 एक्सरे हो जाते हैं। इस अस्पताल को 2012 में सीएचसी का दर्जा प्राप्त हुआ था, लेकिन सीएचसी अस्पताल का दर्जा होने के बावजूद भवन छोटा पड़ गया है। अस्पताल में भवन की कमी के चलते मरीजों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
आरकेएस की मीटिंग में भवन के लिए दो जगहों के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, लेकिन बात वहीं की वहीं रुकी हुई है। भवन के लिए लगभग 20 कनाल जगह की जरूरत है। तभी अस्पताल में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। डॉक्टरों के रहने के लिए आवासीय सुविधा, पार्किंग आदि जरूरी है। वर्तमान में यहां चार डॉक्टर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जबकि एक पद खाली है।
इसके अलावा चीफ फार्मासिस्ट के लिए अलग, स्टाफ नर्स के लिए अलग, माइनर ओटी के लिए अलग, नेत्र रोग विशेषज्ञ के लिए अलग कमरों की व्यवस्था होना जरूरी है। यहां पर बीएमओ के लिए भी अलग कमरे की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके अलावा शिशु रोग के उपचार के लिए अलग कमरे की व्यवस्था जरूरी है।
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पिछले कई सालों से यह अस्पताल इसी भवन में चल रहा है। जमीन की कमी के चलते यहां सीएचसी अस्पताल की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-नरेश कुमार, लहड़ा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को दर्जा मिले 14 वर्ष का समय हो गया है। आज तक इसे अपना भवन नहीं मिल पाया है। कमरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
-करनैल सिंह, गलोड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी लोगों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं, इसलिए भूमि का जल्द चयन होना चाहिए। विभाग को चाहिए कि वह इस ओर कदम उठाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
-रवीना कुमारी, गलोड़
स्थानीय लोगों, प्रशासन और सरकार को सामूहिक रूप से जल्द भूमि का चयन करके भवन का निर्माण कर लेना चाहिए, ताकि लोगों को नजदीक ही स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिल सकें।
-विजय कुमार लहड़ा
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रोगी कल्याण समिति की बैठक में भूमि को लेकर मुद्दा उठाया गया था, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। भूमि की तलाश की जा रही है। उम्मीद है शीघ्र ही जमीन तलाश ली जाएगी।
-अरविंद कौंडल, बीएमओ, स्वास्थ्य खंड गलोड़
विजय कुमार
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