हमीरपुर। पंचायतीराज विभाग हमीरपुर में 42 लाख रुपये के गबन मामले नया खुलासा हुआ है। निलंबित डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बीते वर्ष भी पांच लाख रुपये का गबन किया था। पुराने मामले में विभागीय कार्रवाई के तहत गबन की राशि की रिकवरी कर कार्रवाई की गई थी। जिला परिषद कैडर के डाटा एंट्री ऑपरेटर की पदोन्नति और वेतन बढ़ोतरी भी रोक दी थी। मगर विभागीय कार्रवाई के बावजूद कर्मचारी ने पहले से आठ गुना अधिक राशि के गबन को अंजाम दिया है।
एक वर्ष पूर्व आरोपी कर्मचारी ने सरकारी पैसा अपने दोस्त के बैंक खाते में डलवा दिया। दोस्त को फर्जी वैंडर दर्शा कर इस गबन को अंजाम दिया गया था। इस दौरान गबन की राशि पूर्ण रूप से रिकवर कर ली गई। ताजा मामले में बेहद ही शातिर तरीके से आरोपी ने उन पंचायतों को 15वें वित्त आयोग का पैसा जारी कर दिया था, जिनमें फंड खर्च नहीं होना था अथवा संबंधित पंचायतों में उस श्रेणी के कार्य पूरा हो चुके थे।
फंड वापसी के लिए आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर ने विभिन्न पंचायतों से पैसा सीधे अपने बैंक खाते में डलवा लिया। अब इस मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ ही पुलिस में केस दर्ज किया गया है। सदर थाना हमीरपुर पुलिस टीम मामले की छानबीन में जुटी है। वहीं, एसडीएम हमीरपुर मुनीष कुमार सोनी इस मामले की विभागीय जांच करेंगे। जांच पूरी होने के बाद विभाग की ओर से आगामी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि निलंबन के बाद अब जिला परिषद कैडर के डाटा एंट्री ऑपरेटर को खंड विकास अधिकारी कार्यालय हमीरपुर में अटैच कर दिया गया है। अब आरोपी की नौकरी के पूर्ण इतिहास को खंगाला जाएगा। अब तक के सेवा काल में सरकारी फंड के लेनदेन से जुड़े हुए तमाम कार्यों की जांच की जाएगी। ऐसे में इस मामले में और भी कई खुलासे होने की आशंका जताई जा रही है।
जिला परिषद हमीरपुर की डीपीओ शशिबाला ने कहा कि मामले में विभागीय जांच एसडीएम हमीरपुर करेंगे। जांच पूरा होने तक निलंबित कर्मचारी को खंड विकास अधिकारी कार्यालय हमीरपुर में अटैच किया गया है। मामले में निष्पक्षता से जांच की जा रही है।