बड़ा की सीमा घर पर बड़िया पैक करते हुए। संवाद
बड़ा (हमीरपुर)। बड़ा गांव की सीमा देवी ने घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बड़ियां, अचार और पापड़ बनाने के पारंपरिक काम को छोटे कारोबार का रूप दिया है। आज इसी काम से वह हर माह करीब पांच से सात हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं और गांव की पांच महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ चुकी हैं।
सीमा के पति खेतीबाड़ी करते हैं और उनके तीन बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच घर से ही ऐसा काम शुरू करने का विचार आया, जिसे बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के साथ आसानी से किया जा सके।
बड़ियां, पापड़ और अचार बनाने का पारंपरिक हुनर पहले से ही आता था, इसलिए उन्होंने इसी को अपनी ताकत बनाने का फैसला किया। शुरुआत में सीमित मात्रा में उत्पाद तैयार किए और धीरे-धीरे इन्हें स्थानीय दुकानों तक पहुंचाना शुरू किया।
अब मांग के अनुसार दुकानों में नियमित आपूर्ति कर रही हैं। काम बढ़ने पर उन्होंने गांव की पांच अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ा है और मांग के अनुसार काम करने वाली महिलाओं को मासिक वेतन देती हैं।
सीमा केवल खाद्य उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं। खाली समय में कपड़ों की सिलाई, कढ़ाई सहित अन्य काम करके भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। उनका प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देता है कि घर की जिम्मेदारियों के साथ पारंपरिक हुनर को भी रोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है।