अवाहदेवी (हमीरपुर)। लोक निर्माण विभाग समीरपुर टिपर में बैटरी की खराबी को ठीक करवाने की बजाय निजी वाहनों से निर्माण सामग्री और अन्य सामान ढुलवा रहा है। विभाग सड़कों को बनाने और उनकी मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन अपने वाहनों के रखरखाव में फिसड्डी साबित हो रहा है।
लोक निर्माण विभाग उपमंडल समीरपुर में महज एक टिपर है। वह भी तीन माह से बैटरी के अभाव में खड़ा है। विभाग तीन महीनों से इस टिपर के लिए एक बैटरी का प्रावधान नहीं कर सका है, जबकि सड़कों की मरम्मत का सामान और मलबे को ढोने के लिए निजी टिपरों का सहारा लिया जा रहा है। जिससे सरकार को दोहरा चूना लग रहा है।
एक ओर निजी टिपर मालिक को लाखों रुपये किराया देना पड़ता है और ऊपर से जो टिपर खड़ा है, उसके अन्य कलपुर्जे भी खराब हो रहे हैं। वहीं टिपर के चालक को भी बिना किसी कार्य के वेतन सरकारी खजाने से दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जितना किराया प्रतिदिन विभाग निजी टिपर ऑपरेटरों को दे रहा है, उससे कहीं सस्ते में तो टिपर की बैटरी ही आ जाएगी, लेकिन विभाग निजी टिपर मालिकों को फायदा दिलवाने के चक्कर में सरकारी टिपर की बैटरी मंगवाने में ढुलमुल रवैया अपना रहा है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग उपमंडल समीरपुर के सहायक अभियंता नितीश भारद्वाज का कहना है कि टिपर में तकनीकी खराबी है, उसको ठीक करवाने के लिए विभाग को अवगत करवाया गया है। आवश्यक कार्य को करने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।