संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। बच्चों में पाए जाने वाले दुर्लभ कावासाकी रोग का इलाज अब मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ही मिल रहा है। इसके लिए अब बच्चों के अभिभावकों को पीजीआई चंडीगढ़ या अन्य बाहरी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के शिशु रोग विभाग में इस रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज की सुविधा दी जा रही है।
पूर्व में अगर जिला में कोई बच्चा इस रोग से पीड़ित पाया जाता था तो उसे उपचार के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता था, लेकिन अब मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ही इसके इलाज के लिए आईवीआईजी टीकाकरण हो रहा है और शिशु रोग विशेषज्ञों की देखरेख में बच्चों को रखकर उसका उपचार किया जा रहा है।
कावासाकी रोग बच्चों का दुर्लभ रोग है, जो हजारों बच्चों में से एक को होता है। इसके लक्षणों में बुखार, फटे और सूजे हुए होंठ, मुंह और जीभ का लाल होना, शरीर पर लाल चकते, धमनियों सहित मुंह और पैरों में सूजन, गर्दन की लिंफ नोड (लसिका ग्रंथि) बढ़ना आदि शामिल है। यदि कावासाकी रोग का समय पर उपचार न किया जाए तो इससे दिल के रोग का खतरा रहता है। यह बच्चों में अधिकतर पाया जाता है।
इनमें भी पांच साल तक के बच्चों में इसके होने की संभावना अधिक रहती है। इसके उपचार के लिए चिकित्सक आईवीआईजी इंजेक्शन की खुराकें बच्चे की उम्र और वजन के हिसाब से लगाते हैं। इस टीके की एक खुराक 14 से 15 हजार रुपये की आती है। स्वास्थ्य कार्डधारकों को यह खुराक निशुल्क मिलती है। खुराक लगने के दो से तीन दिन में बच्चे की सेहत में सुधार होने लगता है।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की आरडीए एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष का कहना है कि इस दुर्लभ रोग के इलाज के लिए अब बच्चों के अभिभावकों को उन्हें लेकर पीजीआई या अन्य अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं है, हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में ही इसका उपचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे में लक्षण दिखने पर उसे तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। हालांकि यह रोग हजारों बच्चों में से किसी एक को होता है।