हमीरपुर। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में जहां आज भी रोजगार के सीमित अवसर हैं, वहां ब्याड़ की पूजा सहोत्रा ने अपने हुनर के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है।
पूजा ने मैक्रेम तकनीक को अपनाकर घर से ही कारोबार शुरू किया और आज हैंडक्राफ्ट सजावटी सामान के जरिए अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। उनकी यह पहल अब सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे यह शौक उनके लिए रोजगार का जरिया बन गया।
उन्होंने इंटरनेट और अन्य माध्यमों से मैक्रेम की बारीकियां सीखीं और छोटे-छोटे प्रोडक्ट बनाकर अपने काम की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने वॉल हैंगिंग, टेबल मैट, प्लांट हैंगर, डेकोरेटिव आइटम और कई अन्य सजावटी सामान बनाना शुरू किया।
शुरुआत में पूजा ने अपने उत्पादों को आसपास के लोगों और परिचितों के बीच बेचना शुरू किया। काम की गुणवत्ता और सुंदरता के चलते धीरे-धीरे उत्पादों के लिए ऑर्डर बढ़ने लगे और उनका काम गांव से बाहर तक पहचान बनाने लगा। आज पूजा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी अपने उत्पादों की बिक्री कर रही हैं।
इससे उन्हें न केवल ज्यादा ग्राहक मिल रहे हैं, बल्कि उनके काम को एक नई पहचान भी मिल रही है। उनकी इस सफलता ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है। मैक्रेम के साथ उन्होंने अब क्रोशिये और सिलाई के काम को शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि घर पर स्वयं के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे सकें।
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मैक्रेम
एक प्राचीन कला है, जिसमें धागों या रस्सियों को सूई के बजाय मुख्य रूप से गांठ लगाकर सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। यह बहो स्टाइल की होम डेकोर, जैसे वॉल हैंगिंग, प्लांट हैंगर, टेबल रनर और कीचेन के लिए बहुत लोकप्रिय है। इसके लिए सूती धागे और लकड़ी के छल्लों का उपयोग किया जाता है।
क्रोशिये से तैयार किया गया पर्स । संवाद- फोटो : ऊंचाहार के मनीरामपुर स्थित टेल के पास काटे गए पेड़।