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डर से कार्यस्थल पर यौन शोषण के महज 15 फीसदी मामले ही हो पाते हैं रिपोर्ट : एसडीएम

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तकनीकी विवि हमीरपुर में आयोजित अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के दौरान विभिन्न - फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ हुए यौन शोषण के महज 15 फीसदी मामले ही महिला एवं बाल विकास विभाग या पुलिस के पास दर्ज हो पाते हैं। जबकि, 85 फीसदी मामले महिलाओं के डर के कारण दबे ही रह जाते हैं। समाज के लोग क्या कहेंगे, इसी बात से डरकर महिलाएं अत्याचार सहन करती रहती हैं, लेकिन महिलाओं को अपने अधिकारों और खासकर कार्यस्थल पर यौन शोषण के प्रति बने रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के प्रति जागरूक होना जरूरी है। तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के सभागार में महिला एवं बाल विकास विभाग और अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में यह शब्द उपमंडलाधिकारी (ना.) हमीरपुर डॉ. चिंरजी चौहान ने कहे। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में जिला सहायक न्यायवादी आशुतोष परमार और सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष एडवोकेट रेखा शर्मा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कार्यक्रम अधिकारी एचसी शर्मा ने की।
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इस मौके पर विभिन्न विभागों के कार्यालय से आई महिलाओं ने कार्यस्थल पर यौन शोषण और रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। रेखा शर्मा ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायत के लिए प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत कमेटी (आईसीसी) का गठन जरूरी है। यदि किसी कार्यालय में यह गठित नहीं है या कार्यस्थल में दस से कम कर्मचारी हैं तो यहां पर यौन शोषण का शिकार होने वाली महिला कर्मचारी लोकल कंप्लेट कमेटी (एलसीसी) के पास शिकायत कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल में यौन शोषण में सरकारी, गैर सरकारी, संस्था, कार्यालय, ठेकेदार की लेबर या घर पर मौजूद नौकरानी के साथ यौन शोषण भी इसी दायरे में आता है। कार्यस्थल पर यौन शोषण की रोकथाम के लिए नौ सितंबर 2013 को रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 देश में लागू हुआ था। प्रत्येक कार्यालय में आईसीसी का गठन करना अनिवार्य है। जिसकी अध्यक्ष महिला होगी और 50 फीसदी से अधिक सदस्य भी महिलाएं होनी चाहिए। यौन शोषण की शिकार महिला स्वयं या उसके रिश्तेदार व उपचार करने वाले मनोचिकित्सक भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। महिला यौन शोषण के तीन माह के अंदर आईसीसी या एलसीसी को शिकायत दर्ज करवा सकती है। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों से आह्वान किया कि कार्यस्थल पर ऐसा माहौल बनाएं की महिलाएं असहज महसूस न करें। इस मौके पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी तिलकराज आचार्य, सीडीपीओ बलवीर सिंह बिरला, कल्याण चंद, जिला पंचायत अधिकारी हरवंश सिंह सहित विभिन्न विभागों से आए अधिकारी मौजूद रहे।
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देर रात व्हाट्सएप मैसेज करना भी गलत : परमार
जिला सहायक न्यायवादी आशुतोष परमार ने उपस्थित महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में विस्तृत रूप से बताया। उन्होंने कहा कि देर रात को किसी ऑफिशियल ग्रुप या निजी नंबर पर कार्य के अलावा मैसेज करना भी रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 की उल्लंघना के तहत आता है। कार्यस्थल बहुत विस्तृत है। कार्यालय के काम से बाहर जाते हुए यदि कोई किसी महिला से छेड़छाड़ करता है, घर पर नौकरानी से छेड़छाड़, ऑफिस टूअर पर महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ अधिनियम 2013 के तहत जुर्म है। इस पर कार्रवाई हो सकती है।
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विभाग के पास कार्यस्थल पर छेड़छाड़ के आए चार केस : डीपीओ
जिला कार्यक्रम अधिकारी एचएसी शर्मा ने कहा कि कार्यस्थल पर योन शोषण की रोकथाम के लिए गठित कमेटी के पास चार मामले इस तरह के आए है। जिनमें दोनों पक्षों की बता सुनकर इनका समाधान किया गया है। कार्यस्थल पर यौन शोषण को लेकर महिलाओं को जागरूक करने के लिए यह एक बेहतरीन कार्यक्रम था। जिसमें आए हुए अतिथियों ने महिलाओं को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अमर उजाला का भी आभार व्यक्त किया।
महिलाओं ने दूर कीं शंकाएं-
क्या कपड़ों पर कमेंट करना भी यौन शोषण : संगीता
कृषि विभाग की एडीओ संगीता ने पूछा कि अगर कार्यालय में कोई महिला कर्मचारी के पहनावे पर कमेेंट करता है और महिला कर्मचारी के हाथ को पकड़ता है तो क्या यह कार्यस्थल पर यौन शोषण की श्रेणी में आएगा। इस पर सहायक जिला न्यायवादी ने कहा कि कपड़ों पर कमेंट करना इस श्रेणी में आता है। रेखा शर्मा ने कहा कि अगर हाथ पकड़ने से महिला कर्मचारी असहज महसूस करती है तो यह इसके तहत जुर्म है।
फील्ड जॉब में ग्रामीण का कमेंट करना क्या इस श्रेणी में : रमा
वन विभाग की वन रक्षक रमा ठाकुर ने कहा कि उनकी फील्ड जॉब है। अगर फील्ड में ड्यूटी देते हुए कार्यालय से बाहर का कोई ग्रामीण व्यक्ति उनके बारे में कोई कमेंट करता है तो क्या यह कार्यालय में यौन शोषण की श्रेणी में आएगा। इस पर रेखा शर्मा ने कहा कि यह कार्यस्थल पर यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आता है, लेकिन इसके तहत आप पुलिस में आईपीसी के तहत मामला दर्ज करवा सकते हैं।
गवाह मुकरने पर क्या करें: नीलम
राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर की प्रवक्ता प्रो. नीलम गुलेरिया ने कहा कि अगर कार्यस्थल पर हुए यौन शोषण के गवाह ही मुकर जाएं तो क्या कार्रवाई होगी। इस पर रेखा शर्मा ने कहा कि ताजा मामला दर्ज करवाना चाहिए। गवाह मुकरने की स्थिति में पीड़ित महिला का बयान ही गवाह के तौर पर लिया जाता है।
कार्यालय समय के बाद पीछा करना किस श्रेणी में : मनिका
कनिष्ठ अभियंता मनिका ने कहा कि अगर कोई ऑफिस समय के बाद भी पीछा करता है तो क्या यह किस अपराध की श्रेणी में आता है। इस पर एडीए ने कहा कि यदि कार्यालय का कर्मचारी पीछा करता है तो यह कार्यस्थल पर यौन शोषण की श्रेणी में आएगा।
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