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Hamirpur (Himachal) News: अब जगमगाती इलेक्ट्रॉनिक वेदिका के नीचे बैठकर शादी के बंधन में बंधेंगे दूल्हा-दुल्हन

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जोलसप्पड़ क्षेत्र के महेंद्र सिंह ने दिया वेदिका को इलेक्ट्रॉनिक रूप
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ट्रीटमेंट प्लांट में सिंबल की लकड़ी को करवाया ट्रीट
मोटर का इसेतमाल कर लगाई रंग-बिरंगी लाइटें
हिंदू परंपरा के अनुसार वेदिका के नीचे बैठकर निभाए जाएंगे विवाह संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी

रंगस (हमीरपुर)। अब शादी की रस्में जगमगाती इलेक्ट्रॉनिक वेदिका के नीचे बैठकर रीति-रिवाज के अनुसार पंडित के मंत्रोच्चारण के साथ निभाई जाएंगी। पहले शादियों में लकड़ी की नक्काशी की हुई वेदिका का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे इलेक्ट्रॉनिक वेदिका का रूप दिया है पेशे से हार्डवेयर दुकानदार और कर्मकांड का कार्य करने वाले जोलसप्पड़ क्षेत्र के महेंद्र सिंह ने। उन्होंने सिंबल की शुद्ध लकड़ी से शादी के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वेदिका का निर्माण किया है। महेंद्र सिंह ने बताया कि रीति रिवाज और परंपरा के अनुसार सबसे पहले शुद्ध मानी जाने वाली सिंबल की लकड़ी का प्रावधान करके टिंबर ट्रीटमेंट प्लांट में उसको ट्रीट करवाया गया। उसके सूखने के बाद वेदिका का निर्माण कार्य शुरू किया गया। वेदिका को तैयार करने में चार पिलरों का निर्माण किया गया। इनके ऊपर वेदिका को टांग कर शादी की रस्मों को पूरा किया जाना है। वर्तमान समय के तकनीकी युग को देखकर मन में एक विचार आया कि क्यों न वेदिका को भी इलेक्ट्रॉनिक रूप दिया जाए। इसी के चलते इसके बीच में एक मोटर स्थापित की गई। यह एक्सेल के माध्यम से वेदिका पर लगने वाले मोरों को लगातार घुमाने का कार्य करेगी और इसके साथ ही कई रंगों के जीरो वाट के बल्ब भी लगाए गए हैं ताकि वेदिका के घूमने पर शादी का मंडप पूर्ण रूप से आकर्षक लगे। वेदिका का पहला सफल ट्रायल सोमवार को ही किया गया। ट्रायल के बाद इसमें जो भी कमियां दिखाई दीं, उन्हें भी शीघ्र दूर कर दिया जाएगा।
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हिंदू रीति रिवाज के अनुसार वैदिक विवाह संस्कारों को दूल्हा और दुल्हन इसी वेदिका के नीचे बैठकर निभाते हैं। जिला हमीरपुर और कांगड़ा के क्षेत्रों में लड़की की शादी होने पर उसके मामा की ओर से वेदिका लाई जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महेंद्र सिंह ने पूरी लग्न और मेहनत से वर्तमान के आधुनिक युग में वेदिका को पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉनिक बना दिया है। उन्होंने बताया कि वेदिका के निर्माण में लगभग एक माह से ज्यादा का समय लगा है और इसमें काफी धनराशि खर्च हुई है और अभी भी इसका निर्माण कार्य चला हुआ है।
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