सीजन खत्म होने की कगार पर खोले गए थे केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। बागवानों को आम का बेहतर दाम मिले, इस उद्धेश्य की पूर्ति के लिए जिले के 5 स्थानों में आम संग्रह केंद्र खोले गए थे। सरकार की इस मुहिम को उस समय झटका लगा जब इन केंद्रों में एक भी बागवान ने आम की फसल को नहीं बेचा है। इन केंद्रों में आम का संग्रहण शून्य हुआ है। फिलहाल सरकार की ओर से इन्हें बंद कर दिया गया है। अब इन्हें अगले साल पुन: खोला जाएगा। इस वर्ष इन केंद्रों को तब खोला गया था, जब आम का सीजन खत्म होने के कगार पर था।
आम संग्रह केंद्रों को अगस्त की शुरुआत में खोला गया था लेकिन तब तक आम की सभी किस्मों के फलों को बागवान बेच चुके थे। कुछ ही किस्म के आम के फल बचे थे। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत प्रदेशभर मेंं हिमफेड और एचपीएमसी के माध्यम से 42 आम संग्रह केंद्र खोले गए थे। इनमें हमीरपुर जिले के 5 केंद्र भी शामिल थे। इन आम संग्रह केंद्रों में बागवानों से आम 12 रुपये प्रति किलो की दर से लिया जाना प्रस्तावित था। गोर रहे कि सरकार की ओर से हर साल इन आम संग्रह केंद्रों को खोला जाता है ताकि किसी बागवान को मंडी या बाहरी राज्यों के आम ठेकेदारों के मूल्य संतोषजनक नहीं लगते हैं तो वह इन संग्रह केंद्रों में आम बेच सकता है। लेकिन, इस बार आम संग्रह केंद्रों को खुलने में देरी हो गई। 25 जून के बाद आम की फसल तैयार शुरू होना हो जाती है। उसके बाद यह मंडियों में बिकने को तैयार हो जाता है। इस बारे में बागवानी विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने कहा कि बागवानों को आम का बेहतर दाम मिले, इसके लिए जिला में 5 आम संग्रह केंद्र खोले गए थे। यहां पर एक भी बागवान ने अपनी आम की फसल को नहीं बेचा है। यहां आम का संग्रहण नहीं हुआ है। फिलहाल इन्हें बंद कर दिया गया है। अब इन केंद्रों को अगले वर्ष खोला जाएगा।