शिक्षा का हब कहे जाने वाले हमीरपुर में कोचिंग सेंटर, पेईंग गेस्ट (पीजी) और निजी पुस्तकालयों के लिए अब तक प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि प्रशासन, शिक्षा विभाग और नगर निगम के पास शहर में संचालित ऐसे संस्थानों की सही संख्या तक उपलब्ध नहीं है।
अग्निशमन विभाग के पास भी यह जानकारी नहीं है कि कितने कोचिंग सेंटर, पीजी या निजी पुस्तकालयों में आग से सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी कोचिंग सेंटर या पीजी का नियमित निरीक्षण नहीं किया गया है।
शहर के कई क्षेत्रों में तंग गलियों और बहुमंजिला भवनों में कोचिंग सेंटर और पीजी संचालित हो रहे हैं, जबकि पंजीकरण की स्थिति बेहद कमजोर है। नगर निगम अभी तक पीजी संचालकों के लिए उपनियम भी तय नहीं कर सका है। प्रशासन के अनुसार शहर में केवल एक ही कोचिंग सेंटर पंजीकृत है।
हाल ही में हुए कुछ बड़े अग्निकांडों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा जा रहा है। अधिकारी फिलहाल शिकायत मिलने पर ही निरीक्षण करने की बात कह रहे हैं।
शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही जरूरी है। हमीरपुर में अन्य जिलों व राज्यों के बच्चे भी पढ़ने के लिए आते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन को कदम उठाने चाहिएं। -
सुरजीत सिंह, निवासी हमीरपुर
लखनऊ में घटित घटना से स्थानीय प्रशासन को सबक लेना चाहिए और जिले में चल रहे सभी शैक्षणिक संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि हादसों की संभावनाओं को कम किया जा सके। -
राकेश जम्वाल, निवासी चौकी जंबाला
अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। नियमों के अनुसार तीन मंजिला भवन ही बना सकते हैं, लेकिन यहां पर कई-कई मंजिला भवन बनाए जा रहे हैं। अधिकारी सख्त होंगे, तभी नियमों का पालन होगा। -
दुर्गा सिंह, निवासी वार्ड नंबर आठ, हमीरपुर
हमीरपुर में पीजी सेंटर चल रहे हैं, कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। निजी पुस्तकालय भी चलाए हुए हैं। इनकी जांच होनी जरूरी है। नियम तय होंगे तो लोगों की सुरक्षा भी होगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को कदम उठाने चाहिएं। -
राजीव गौतम, निवासी वार्ड नंबर दस