हमीरपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में करीब डेढ़ दशक से सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे 12 सुरक्षा कर्मियों को नौकरी से हटा दिया है। संस्थान की ओर से गठित कमेटी ने सुरक्षा कर्मियों के लिए 58 साल उम्र की शर्त निर्धारित की है। जबकि इससे पूर्व इस तरह की कोई शर्त सुरक्षा कर्मियों के लिए नहीं थी। इस नई शर्त के लागू होने के बाद संस्थान में सालों से सेवाएं दे रहे सुरक्षा कर्मियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। नौकरी से निकाले गए सुरक्षा कर्मियों ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से न्याय की गुहार लगाते हुए इस मामले में हस्ताक्षेप करने की मांग उठाई है।
सुरक्षा कर्मियों प्रताप सिंह, सुशील कुमार, सुखदेव सिंह, जोगिंद्र सिंह, सुभाष चंद, विजय कुमार और देश राज ने कहा कि वह पिछले पंद्रह सालों से एनआईटी हमीरपुर में सुरक्षा कर्मी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में सीआईएसएस कंपनी के पास सुरक्षा का जिम्मा है। लेकिन अब नई कंपनी को सिक्योरिटी का टेंडर अवार्ड हुआ है। इसके चलते अब एनआईटी के वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी सुरक्षा कर्मियों के इंटरव्यू ले रही है। गत दिवस उन्हें ओवरएज बताते हुए नौकरी से निकाल दिया। जबकि इससे पूर्व 65 वर्ष उम्र के सुरक्षा कर्मी भी सेवाएं देते रहे हैं।
सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि नौकरी से निकाले जाने के बाद परिवार के पालन पोषण की समस्या खड़ी हो गई है। पंद्रह साल तक एक संस्थान में सेवाएं देने के बाद अब नौकरी के लिए कहां धक्के खाएंगे।
उधर, एनआईटी हमीरपुर के सुरक्षा विभाग के इंचार्ज पीके सूद ने बताया कि उन्हें मीडिया में बोलने के लिए मनाही है। इस बारे में संस्थान के उच्चाधिकारी ही बयान दे सकते हैं। जबकि संस्थान के रजिस्ट्रार प्रो. योगेश गुप्ता ने फोन नहीं उठाया।