फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घिसे टायरों, टूटे शीशों के साथ दौड़ाई जा रहीं अधिकतर सरकारी बसें

विज्ञापन
हमीरपुर से सरकाघाट के लिए जाने वाली निगम की बस में शीशे की जग लगाई टीन। - फोटो : Hamirpur-HP
विज्ञापन
हमीरपुर। एचआरटीसी हमीरपुर डिपो की अधिकांश बसें घिसे टायरों के साथ रूटों पर दौड़ाई जा रही हैं। इसकी शिकायत जब चालक निगम से करते हैं तो रबर चढ़ाकर बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। इससे यात्रियों की जान भी जोखिम में रहती है। शनिवार और रविवार को हमीरपुर से हरिद्वार के लिए रवाना हुई बसों के टायर घिसे हुए थे। इसके अलावा 150 के करीब बसों में से आधी से ज्यादा बसों के टायर घिसे हुए हैं और रबर चढ़ाए हुए हैं। इन बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। वहीं, बसों के भीतर आग से बचने के लिए अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे हुए हैं। ऐसे में गर्मियों के दिनों में अग्निकांड होने की सूरत में अधिक नुकसान हो सकता है। हमीरपुर डिपो की कुल 146 में से 65 बसें ऐसी हैं जो दस लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं और जीरो वैल्यू की हो गई हैं। ऐसी बसों में आए दिन खराबी आ रही है।
विज्ञापन

एचआरटीसी वर्कशॉप में भी रोजाना औसतन 35 बसें मरम्मत के लिए आती हैं। एक कर्मचारी के पास चार से पांच बसों की मरम्मत का जिम्मा है। कर्मचारियों की संख्या कम है। हमीरपुर वर्कशॉप में 78 तकनीकी कर्मचारी हैं। इनमें से महज 12 मेकेनिक, दो सीनियर मेकेनिक और 18 पीसमील कर्मचारी हैं। जबकि, टायरमैन कोई भी नहीं है। महज दो पीसमील कर्मचारी ही टायरमैन ट्रेड के हैं। अन्य कर्मचारी अन्य ट्रेडों के हैं। ऐसे में मेकेनिक कम होने के चलते एक कर्मचारी पर चार से पंाच बसों का जिम्मा रहता है। उधर, निगम की कई बसें ऐसी भी हैं, जिनमें शीशे की जगह टीन से काम चलाया जा रहा है। हमीरपुर डिपो की एचपी 28ए 3350 जेनुरम बस में पिछले शीशे की जगह टीन लगाई गई है। रविवार को सोलन-धर्मशाला के लिए जा रही सोलन डिपो की बस में भी शीशे की जगह टीन लगाई गई है।
इस संबंध में एचआरटीसी हमीरपुर डिपो के उपमंडलीय प्रबंधक विवेक लखनपाल ने कहा कि हमीरपुर डिपो में टायरों की कोई कमी नहीं है। जिन बसों के शीशे टूटे थे, वह लगवा दिए गए हैं। निगम यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें