स्कूटी चलाते हुए दिव्यांग दीदार सिंह
हमीरपुर। जिंदादिल इंसान ही मुसीबतों को मात देते हैं। कैंसर से टांग कट गई पर बिझड़ी निवासी दीदार सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और आज बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन उन्हें रोजगार की राह दिखा रहे हैं। दीदार सिंह उन बेरोजगार युवाओं के लिए मिसाल हैं जो शैक्षणिक योग्यता के बावजूद रोजगार न मिलने की दुहाई देते हैं। कैंसर को मात देकर 49 वर्षीय दीदार सिंह हर रोज स्कूटी चलाकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर कर अचार व अन्य उत्पाद बेचते हैं। कैंसर की वजह से साल 2012 में उनकी टांग काट दी गई। एक टांग के सहारे पिछले एक दशक से दीदार इस कार्य को कर रहे हैं। वह हर माह 20 हजार के करीब कमाई कर गुजर बसर कर रहे हैं।
पेशे से टैक्सी चालक दीदार सिंह साल 2011 में चंबा में हादसे का शिकार हो गए थे। वह रावी में गिर गए थे। इस दौरान उनकी टांग में गंभीर चोट लगी। इसके एक साल बाद इस टांग में कैंसर हो गया। इस वजह से डाॅक्टरों ने उनकी एक टांग को काट दिया, लेकिन दीदार सिंह ने हार नहीं मानी। दीदार के माता-पिता भी दुनिया में नहीं है। वह बीमारी की वजह से बिल्कुल अकेले पड़ गए। एक टांग कट जाने से दीदार को दिनचर्या के कार्य करने में दिक्कत पेश आने लगी। एक साल तक वह इन परेशानियों से जूझते रहे और रोजगार के लिए तलाश शुरू कर दी। एक टांग कट जाने से वह टैक्सी तो नहीं चला सकते थे लेकिन उन्होंने स्कूटी पर अचार और अन्य उत्पाद बेचने का कार्य शुरू किया। बड़सर क्षेत्र में अचार व चटनी की फैक्ट्री चलाने वाले रतन चंद शर्मा ने उन्हें मौका दिया। कारोबारी रतन चंद शर्मा ने दीदार सिंह को स्कूटी भी खरीद कर दी। वह प्रदेशभर के कई जिलों में जाकर अचार की सप्लाई स्कूटी के जरिये करते हैं। दुकानों में सप्लाई के साथ ही दीदार गांवों में घरद्वार में भी अचार बेचते हैं। दस साल से वे इस कार्य को कर रहे हैं। एक टांग के बिना बैसाखी की मदद से कार्य करता देख हर कोई उनकी सराहना करता है।
कोट
दीदार सिंह उर्फ बंटी का कहना है कि बीमारी के वक्त वह टूट गए थे। उस वक्त किसी ने साथ नहीं दिया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि कारोबारी रतन चंद शर्मा ने उनका साथ दिया। वह ऊना, बिलासपुर सहित अन्य जिलों में अचार की सप्लाई देते हैं। इस कार्य से अपनी कमजोरी नहीं बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति का अहसास होता है।