कुल्लू जिला में मौसम की मार के चलते नही उग पाई मटर की फसल।-संवाद
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू में सूखे की मार से किसान चिंतित हो गए हैं। लहसुन के बाद अब बीजे गए मटर की बीज नमी के कमी से अंकुरित ही नहीं हो पा रहे है। नकदी फसल मटर का बीज अंकुरित न होने से किसान फसल को लेकर चिंतित हो गए हैं। पिछले वर्ष मटर के उम्दा दाम मिलने से किसानों ने इस बार करीब दोगुना मटर की बिजाई की है। मगर तीन माह से सूखे के हालत से फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
जिला कुल्लू में 80 फीसदी मटर की बिजाई हो चुकी है, लेकिन सूखे के कारण 20 फीसदी बिजाई अभी भी रुकी है। इस साल कृषि विभाग ने जिला कुल्लू के किसानों में 850 क्विंटल मटर का बीज वितरित किया है। इसके अलावा 150 क्विंटल बीज की अतिरिक्त मांग भेज गई है। पिछले साल विभाग ने करीब 600 क्विंटल मटर बीज किसानों को बांटा था।
किसान सभा के उपाध्यक्ष देव राज नेगी, किसान लीला प्रसाद, मेघ सिंह और किशोरी लाल ने कहा कि जिला में तीन माह से बारिश नहीं होने से मटर की फसल का दाना अंकुरित नहीं हो पा रहा है। किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई के साधन न होने से पूरी खेती बारिश पर निर्भर है। ऐसे में किसान फसल के प्रति काफी चिंतित हो गए हैं। बादल न बरसने लहसुन के साथ गेहूं व जौ की फसलें भी मुरझाने के कगार पर पहुंच गई हैं। जिला में करीब 2,900 हेक्टेयर पर मटर की खेती की जाती है, जिससे लगभग 2,5000 किसान जुड़े हैं।
कृषि उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि जिला कुल्लू में बारिश न होने से रबी फसल पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। नकदी फसल लहसुन के साथ मटर पर भी सूखे की मार पड़ रही है। समय पर बारिश नहीं होती है तो नुकसान हो सकता है। कहा कि जिले में 850 क्विंटल मटर बीज विभाग ने वितरित किया है और 150 क्विंटल की अतिरिक्त बीज की मांग विभाग ने भेजी है।