जोगिंद्रनगर में मिट्टी के आकर्षक दीपकों से सजी एक दुकान। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। दीपावली पर जोगिंद्रनगर के बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग से स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं को कारोबार की नई उम्मीद जगी है। चाइनीज लड़ियों के बजाय स्वदेशी उत्पादों को तरजीह देने से मिट्टी के रंग-बिरंगे दीपक ग्राहकों को लुभा रहे हैं।
शहर के मुख्य बाजार, बस अड्डा परिसर और सरकाघाट सड़क पर सजी दुकानों में दीयों की खूब बिक्री हो रही है। मंडी और कांगड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के तैयार किए दीपक भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। बाजार में दो से 150 रुपये तक के दीपक उपलब्ध हैं। इनमें नक्काशीदार और रंग-बिरंगे डिजाइन वाले दीयों की मांग अधिक है।
दीपक तैयार कर आजीविका कमाने वाले विनय कुमार और सुनीता देवी ने बताया कि स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने से उन्हें अच्छे कारोबार की उम्मीद है। शिखा और सविता ने भी कहा कि इस बार मिट्टी के दीयों की मांग अच्छी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद दुकानों में उपलब्ध करवाए गए हैं। इसका उद्देश्य दीपावली पर स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों को बिक्री का बेहतर अवसर देना है, ताकि त्योहार सभी के लिए लाभदायक साबित हो सके। -भास्कर गुप्ता, अध्यक्ष, व्यापार मंडल जोगिंद्रनगर
दीपावली पर बाजार में मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग के बीच चाइनीज लड़ियों की चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है। स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को लेकर लोगों में उत्साह है। इससे स्थानीय कारोबारियों को बेहतर रोजगार मिलने की उम्मीद है। -अजय ठाकुर, स्थानीय निवासी
दीपावली पर स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने के लिए स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी पर ध्यान देना चाहिए। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी मेहनत को बाजार में उचित स्थान मिल सकेगा। -
श्वेता, स्थानीय निवासी