हमीरपुर। दी कृषि सरकारी सभा भलूं की प्रबंध कमेटी के प्रधान ने सभा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। प्रधान जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सभा के ही एक सदस्य ने सभा से आरटीआई के तहत सूचना प्राप्त की है। इसके अनुसार वर्ष 2008 में सरकार की ओर से सभा के 136 किसानों के करीब 10 लाख 45 हजार 21 रुपये का ऋण माफ किया था और दो किस्तों में इस धन राशि को सरकार की ओर से सभा के खातों में डाला गया था।
फिर भी किसानों को अंधेरे में रखकर उनसे पैसे वसूले गए। यह वसूली गई धन राशि किस खाते में गई, कोई अता पता नहीं है। सभा से ही सेवानिवृत्त हो चुके सेल्समैन ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान हर महीने हजारों रुपये की कीमत वाली खाली हुई बोरियों और गत्तों का हिसाब भी नहीं करवाया है। इसके चलते सेवानिर्मित हो चुके सेल्समैन की ओर से सेवानिवृत्ति के समय नो ड्यूज प्रमाण पत्र जमा न करवाने के चलते उसकी ग्रेच्युटी को कमेटी प्रधान जितेंद्र सिंह ने रोक दिया है। सेल्समैन पद से सेवानिवृत्त हुआ कर्मचारी सभा के सचिव का रिश्तेदार भी है। इससे भी सभा को करीब 10 लाख का नुकसान हुआ है। प्रधान का आरोप है कि सहायक पंजीयक हमीरपुर और संपूर्ण विभाग इन घपलों को दबाने का पूरा प्रयास करने में लगे हुए हैं।
क्योंकि इन घपलों में सम्मिलित व्यक्तियों के राजनीतिक रसूख हैं। इसलिए सरकारी तंत्र इस पर बुरी तरह से लीपापोती में लगा हुआ है। प्रधान का आरोप है कि सोसायटी की इमारत के ऊपर सभा हाल के साथ खाली भाग में कमरों का भी निर्माण किया गया है। उसमें भी धन की लूटपाट की गई है। सभा का हर साल विभाग की ओर से आडिट भी किया हुआ है। इसके बदले हर साल लगभग 20 हजार रुपये ऑडिट फीस अदा की गई है, फिर भी ऑडिट करने आए कर्मचारी ने भी ज्यादा गौर नहीं किया। सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के आधार पर रेत, बजरी, पानी के टैंकर की कुटेशन तीन चार महीने बाद आई और पेमेंट जुलाई महीने में ले ली गई। रेत बजरी की कुटेशन ट्राली मंजूर हुई 1450 रुपये प्रति ट्राली, मगर ऑडिट करने वाले ने बिल 1500-1600 रुपए के हिसाब से बना हुआ भी पास कर दिया। पानी के एक टैंकर की कुटेशन 500 रुपये मंजूर हुई फिर भी आडिट करने वाले ने इसे 600 रुपये के हिसाब से बने बिल को पास कर दिया। बिजली की फिटिंग किसी एक व्यक्ति द्वारा की गई है और भुगतान किसी दूसरे को कर दिया गया है। नकली रसीद तैयार कर एक लाख से ज्यादा का खर्चा दर्शाया गया है। हस्ताक्षर करने वाले का कोई अता पता नहीं है। इन सब अनियमिताओं को ऑडिट अधिकारी ने भी नजर अंदाज किया। कमेटी के प्रधान ने बताया कि उन पर कई प्रकार से दबाव बनाए जा रहे हैं और धमकाया भी जा रहा है। उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए सहायक पंजीयक हमीरपुर के माध्यम से भी लगातार तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे इस पर न्यायिक जांच और कार्रवाई चाहते हैं।
दो बार नादौन और सुजानपुर के इंस्पेक्टर कर चुके हैं जांच
इस बारे में सहायक पंजीयक प्रत्यूष चौहान ने कहा कि सभा के सचिव और प्रधान तथा अन्य सदस्यों की अनबन चल रही है। इस कारण सात में से चार सदस्यों ने प्रधान के रवैये से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया है। दो बार नादौन और सुजानपुर के इंस्पेक्टर ने इस मामले पर जांच की है और ऐसा कुछ नहीं पाया गया। इस जांच से यह पक्ष संतुष्ट नहीं पाया गया। इसके बाद एक अन्य कमेटी बनाई गई है। जिसकी पेशी में भी ये नहीं पहुंचे। सभा के लोन के बारे में विभाग को कोई शिकायत नहीं आई है। अगर शिकायत आएगी तो छानबीन की जाएगी।