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Hamirpur (Himachal) News: मुनाफे के चक्कर में राशन डिपुओं में सरकारी के बजाए बाजारी तेल की बिक्री

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सिविल सप्लाई निगम से खेप नहीं ले रहे उचित मूल्य डिपो संचालक
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सस्ते दामों पर बाजार से तेल खरीद कर की जा रही बिक्री

सरकारी दरों पर बिक्री, लेकिन मुनाफा तीन फीसदी के बजाए 20 से अधिक

संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। खाद्य आपूर्ति विभाग के उचित मूल्यों के राशन डिपुओं में स्टेट सिविल सप्लाई निगम के बजाय बाजार का तेल बेचा जा रहा है। मुनाफे के चक्कर में ऊना और हमीरपुर जिले में यह खेल चल रहा है। हर माह हजारों लीटर तेल की खपत बाजार से पूरी की जा रही है, जबकि सरकारी एजेंसी स्टेट सिविल सप्लाई निगम का स्टॉक गोदाम में बच रहा है। सस्ते तेल को खरीदकर सरकारी सप्लाई के दामों पर बेचा जा रहा है।

दोनों जिलों में 4,29000 लीटर तेल की डिमांड सस्ते राशन के डिपुओं में है लेकिन हजारों लीटर तेल गोदामों में बच रहा है। हर माह यह स्टॉक बढ़ता जा रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग का तर्क है कि उचित मूल्य की दुकानों में बाजार के उत्पाद भी बेचे जा सकते हैं। उन पर कोई मनाही नहीं है। इन उत्पादों की गुणवत्ता जांच करने को लेकर विभाग एक तरह से किनारा कर रहा है। विभाग का तर्क है कि वह सिर्फ सरकारी सप्लाई यानी सिविल सप्लाई के स्टॉक के सैंपल की जांच कर सकते हैं जबकि बाजार से खरीदे गए उत्पादों की जांच की जानी है तो वह उपभोक्ता की शिकायत पर खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से की जाएगी। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि अगर बाजारी उत्पाद डिपुओं में बिक रहे हैं और उनकी नियमित जांच नहीं होगी तो उत्पाद की गुणवत्ता का जिम्मा आखिर किसका होगा। हमीरपुर और ऊना दोनों ही जिलों में मुनाफे के चक्कर में डिपो संचालक बाजार से तेल खरीद कर बेच रहे हैं। निगम की सप्लाई से मिलने वाले तेल में एक बोतल पर तीन फीसदी मुनाफा है, जबकि बाजारी तेल बेच कर संचालक एक बोतल पर 20 फीसदी से अधिक कमा रहे हैं। यह तेल भी किसी नामी कंपनियों का नहीं है। ऐसे में गुणवत्ता पर सवाल उठना भी लाजिमी है। स्टेट सिविल सप्लाई को इसकी कई शिकायतें भी मिल चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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यह है आंकड़े -हर माह बीस से तीस हजार लीटर की खपत कम हो रही
स्टेट सिविल सप्लाई निगम के एरिया मैनेजर संजीव वर्मा ने बताया कि इस बारे में खाद्य आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और प्रशासन को अवगत करवा दिया है। जून में राशन डिपो की डिमांड और खपत में हजारों लीटर का अंतर है। तेल का कोटा लगातार बच रहा है। हर माह हजारों लीटर तेल डिपो होल्डर नहीं ले रहे हैं। डिपुओं में बाजार से तेल खरीद कर बेचने की शिकायतें मिली हैं। हर माह बीस से तीस हजार लीटर की खपत कम हो रही है जबकि बाजारी तेल को डिपो संचालक बेच रहे हैं।



खाद्य सुरक्षा विभाग के सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी

खाद्य सुरक्षा विभाग हमीरपुर ने डेढ़ माह पूर्व बड़सर क्षेत्र के एक सरकारी डिपो से बाजार से खरीद कर डिपो में बेचे जा रहे इस तेल के सैंपल भरे थे लेकिन सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। बाजार से सस्ते दामों पर खरीदा जा रहा है यह तेल डिपुओं में धड़ल्ले से बिक रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग हमीरपुर के सहायक आयुक्त अनिल शर्मा ने कहा कि कंडाघाट लैब में जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं। मामले में जांच की जा रही है।
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खाद्य आपूर्ति विभाग हमीरपुर के नियंत्रक अरविंद शर्मा ने कहा कि डिपुओं में बाजार के उत्पाद बेचने पर मनाही नहीं है। विभाग सिर्फ उन उत्पादों की गुणवत्ता को जांचता है जो सिविल सप्लाई की ओर से डिपुओं में उपलब्ध होते हैं। यदि किसी उपभोक्ता को बाजार के उत्पादों से शिकायत हो तो वह खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी शिकायत कर जांच करवा सकते हैं।
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