In case of indigestion, drink cold boiled water: Dr. Naveen
रंगस (नादौन)। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नवीन शर्मा ने कहा कि अजीर्ण में (अपच) की अवस्था में शीतल जल नहीं पीना चाहिए। ऐसी स्थिति में उबला हुआ पानी ही ठंडा करके पीना चाहिए। यह कफ दोष को बढ़ने नहीं देता। इसलिए इसका पाचन भी आसान होता है। इसकी प्रकृति भी हल्की होती है, क्योंकि उबालने के बाद इसकी सख्त प्रकृति समाप्त हो जाती है और यह बिल्कुल हल्का हो जाता है। यहां पित्त का अर्थ सब दोषों में पित्त अत्यधिक होता है, क्योंकि अग्नि संस्कार के कारण यह उबालने के बाद ऐसा होता है। उबले हुए पानी की प्रकृति पैतिक होती है, लेकिन इससे कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ता है। रात को उबालकर रखे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।
यह सभी दोषों को प्रभावित करता है। हम पानी को सुबह उबाल कर ठंडा करके ले सकते हैं, लेकिन रात होने तक ही इसका सेवन कर सकते हैं। रात को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। पानी एक ही स्थानीय स्रोत का पीना चाहिए, नहीं तो इससे अपचन की समस्या हो सकती है। उन्होंने पानी उबालने के भी पैरामीटर बताए हैं।
हमें पानी को तब तक उबालना चाहिए जब तक चौथा हिस्सा ही बचे। फिर उसको शांत स्थान पर रखना चाहिए और वहीं पर ठंडा होने के उपरांत ही इसका सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से कफ दोष को एक चौथाई हिस्से तक कम कर सकते हैं तथा वातदोष को आधा कम कर सकते हैं। पित्त तीन चौथाई ही रहना चाहिए। इसलिए अजीर्ण में शीतल जल का प्रयोग नहीं करना चाहिए अर्थात उबला हुआ पानी ही ठंडा करके पीना चाहिए।