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Hamirpur (Himachal) News: लंपी त्वचा रोग मुक्त जिला बनने की राह में हमीरपुर

Tue, 05 Nov 2024 07:54 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर में इस वर्ष पशुओं में लंपी त्वचा रोग का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इससे जिला लंपी त्वचा रोग मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है। पशुपालन विभाग हमीरपुर ने एहतियातन विभिन्न स्थानों से 10 सैंपल लेकर जांच के लिए शिमला स्थित प्रयोगशाला में भेजे हैं। यदि इन सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो हमीरपुर को लंपी त्वचा रोग मुक्त घोषित किया जा सकता है।
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लंपी त्वचा रोग मुख्यतः गायों और भैंसों में पाया जाता है। यह रोग पशुपालकों के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। वर्ष 2022 में इस रोग ने हमीरपुर समेत पूरे हिमाचल प्रदेश में हजारों पशुओं की जान ले ली थी। इससे पशुपालकों को भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सरकार ने इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई और नियमित टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। बीते वर्ष और इस साल भी इस रोग से बचाव के लिए जिले में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया है।
इस वर्ष जिला हमीरपुर को लंपी त्वचा रोग से बचाव के लिए 13,000 वैक्सीन प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 10,000 वैक्सीन का उपयोग पशुओं में किया जा चुका है। शेष वैक्सीन का टीकाकरण अभियान अभी भी जारी है, ताकि लंपी त्वचा रोग की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके।
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पशुपालन विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि इस साल जिले में लंपी त्वचा रोग का कोई केस दर्ज नहीं हुआ है और रोग की संभावित रोकथाम के लिए 10 सैंपल जांच हेतु भेजे गए हैं। विभाग ने आशा व्यक्त की है कि इस बार की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर हमीरपुर को लंपी त्वचा रोग मुक्त घोषित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

क्या है लंपी त्वचा रोग

लंपी त्वचा रोग एक वायरल बीमारी, जो मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करती है। यह डिजीज वायरस (एलएसडीवी) के कारण होता है, जो कैप्रीपॉक्स वायरस जीनस का सदस्य है। यह मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों और टिक्स द्वारा एक पशु के शरीर से दूसरे पशु के शरीर में फैलता है। लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं को तेज बुखार आने के साथ ही उनकी भूख कम हो जाती है। पशुओं के चेहरे, गर्दन समेत पूरे शरीर में गोल उभरी हुई गांठें बन जाती हैं। दूध देने वाले जानवरों में दूध देने की क्षमता भी कम हो जाती है। इस वायरस के कारण कई पशुओं की मौत तक हो जाती है।
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