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ोनेक्टिविटी न होने से खिलौने साबित हो रही पीओएस मशीनें

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हमीरपुर। जिले के गांवों में राशन डिपुओं पर रखी पॉस मशीनें पर्याप्त सिग्नल न मिलने से सिरदर्द बन गई हैं। डिपो संचालक खुद लोकमित्र केंद्र में जाकर अपनी जेब से पैसे खर्च राशनकार्ड धारकों की केवाईसी करवा रहे हैं। समिति ने कहा कि प्रदेश सरकार डिपो संचालकों की बदहाल आर्थिक स्थिति को देखते हुए कोई नीति न बनाकर आए दिन नए फरमान जारी करके डिपो संचालकों को परेशान किया जा रहा है।
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प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि ने कहा कि प्रदेश के डिपो संचालकों ने पहले सरकार व विभाग के आदेशों के चलते प्रदेश के उपभोक्ताओं की मोबाइल व आधार सीडिंग का कार्य पॉस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों में कनेक्टिविटी न होने के कारण अपनी जेब से पैसा खर्च करके लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से करवाया। अब विभाग ने राशनकार्ड सदस्यों की वेरिफिकेशन के आदेश जारी कर दिए।
जबकि विभाग की ओर से दी गई पॉस मशीनों में डाले गए सिम कार्ड अरसे से बंद होने के कारण मशीनों में कनेक्टिविटी ही नहीं है।
कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश के सभी डिपो संचालकों ने सरकार और विभाग के आदेशों की पालना करते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर सुबह 5:00 बजे भी डिपो खोलकर लोगों को राशन वितरित किया व प्रदेश के बहुत सारे डिपो संचालकों ने घर-घर जाकर भी राशन वितरण का कार्य किया।
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विभागीय मंत्री ने इसके लिए 25.44 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की थी, लेकिन सरकार की ओर से प्रदेश के डिपो संचालकों को पचीस पैसे तक नहीं दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब सरकार से अपने लिए स्थायी नीति की मांग करते हैं तो सरकार कहती है कि आप कमीशन एजेंट हो। यदि हम कमीशन एजेंट हैं तो सरकार हमें राशन वितरित करने का कमीशन देती है न कि अन्य कार्य करवाने का।
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