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Hamirpur (Himachal) News: मैं लड़की थी, यह मेरी गलती थी... के नारे से गूंजा गांधी चौक

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गांधी चौक हमीरपुर में प्रदर्शन करते प्रशिक्षु चिकित्सक व चिकित्सक। संवाद
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हमीरपुर। मैं लड़की थी..यह मेरी गलती थी। शनिवार 11:30 बजे प्रशिक्षु चिकित्सक आकृति कौंडल के इस नारे से जिला मुख्यालय गांधी चौक गूंज उठा। 11: 40 हो रहे हैं और प्रशिक्षुओं सहित चिकित्सक हाथ में न्याय दिलाने की तख्तियां लेकर एकत्रित हो गए हैं। प्रदर्शन में मौजूद सभी चिकित्सक कोलकाता में महिला प्रशिक्षु चिकित्सक की निर्मम हत्या का विरोध कर रहे हैं और न्याय की गुहार लगाई जा रही है।
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जिला हमीरपुर में शनिवार को मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल पीएचसी, सीएचसी में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। चिकित्सकों की पेनडाउन स्ट्राइक शुरू हो गई है। मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं और अन्य चिकित्सकों ने अस्पताल परिसर से लेकर गांधी चौक तक विरोध प्रदर्शन रैली निकाली और महिला चिकित्सक को न्याय दिलाने की सरकार से मांग की। प्रशिक्षु चिकित्सकों ने हाथों में न्याय दिलाने की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। इनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान महिला चिकित्सक की हत्या कर देना चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि हत्या के मामले में संलिप्त पाए जाने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रजीत, फेकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुभाष, डॉ. आशीष ने कहा कि चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। कोलकाता में हुई चिकित्सा की हत्या चिंताजनक है। इस तरह से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। महिला चिकित्सक को न्याय मिलना चाहिए तथा आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए। महिला चिकित्सकों के साथ इस तरह की घटनाएं निंदनीय हैं। विशेषकर महिला डॉक्टरों की उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने दोनों मामलों में प्रशासन से तुरंत उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं, चिकित्सकों की हड़ताल के कारण सभी पीएचसी, सीएचसी व मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही घरों को लौटना पड़ा। 12 बजे हैं और डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आपातकाल में आए मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। वहीं, कुछ मरीज आपातकाल में ही इलाज करवाने के लिए सुरक्षा कर्मचारियों के साथ उलझते नजर आए। लेकिन, आपातकाल में महज उन्हीं मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं जिन्हें अति आवश्यकता थी। अस्पताल की हर ओपीडी के बाहर मरीज थे लेकिन ओपीडी बंद थी। बुजुर्ग, गर्भवती व छोटे बच्चों को इलाज न मिलने से परेशानी हुई और बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। मरीज अन्य स्टाफ से पूछते नजर आए कि डॉक्टर साहब कब आएंगे लेकिन एक ही जवाब था कि आज हड़ताल है और डॉक्टर नहीं आएंगे। ऐसे में मरीज मायूस होकर अस्पताल से चले गए।
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क्या कहते हैं मरीज :



पेट में अचानक दर्द उठा तो आपातकाल में अस्पताल आना पड़ा। लेकिन, यहां आकर पता लगा कि अस्पताल में हड़ताल है। आपातकाल में जाने के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। चिकित्सक ने दवाई दी और बाहर भेज दिया। एक भी बिस्तर खाली नहीं है। -लीला देवी



चिकित्सकों ने अस्पताल में दाखिल होने के लिए बुलाया था लेकिन अब चिकित्सक ही हड़ताल पर हैं। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के कारण बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है। -सोनू,



बच्चा रात से बीमार है। दिखाने के लिए अस्पताल लाए। लेकिन, अस्पताल में आकर पता लगा कि हड़ताल है। जब आपातकाल में जाना चाहा तो कहा गया कि जिनको अति आवश्यकता है उन्हें ही भेजा रहा है। ऐसे में उन्हें बाहर भेज दिया। तीन माह के बच्चे को लेकर अस्पताल आना मुश्किल है। -ज्योती



अस्पताल में हर तरफ सन्नाटा है। आपातकाल वार्ड के बाहर मरीज इलाज के लिए आपस और सुरक्षा कर्मचारियों से उलझ रहे हैं। इलाज के लिए भी खासी परेशानी हो रही है। -अलविंद्र सिंह
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