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Hamirpur (Himachal) News: जिले के जंगलों में आग का कहर, एक साल में 27,581 पेड़ सूखे

Thu, 22 Jan 2026 01:34 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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मैहरे के समीप चीड़ के जंगल में सूखे पेड़। संवाद।
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कमलेश रतन भारद्वाज
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हमीरपुर। हमीरपुर जिले में बीते वर्ष जंगलों में लगी आग ने भारी तबाही मचाई है। इसका असर अब सामने आने लगा है। जिले के जंगलों में एक वर्ष में 27,581 पेड़ सूख गए हैं, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हैं।
सबसे अधिक नुकसान बिझड़ी और बड़सर वन परिक्षेत्र में हुआ है, जहां 13 हजार से अधिक पेड़ सूख चुके हैं, जो कि जिलेभर के जंगलों के आंकड़ों के मुकाबले आधा है। वहीं, जिले के पांच वन परिक्षेत्रों में चीड़ के घने जंगलों में हजारों पेड़ एक साथ सूख गए हैं। यह स्थिति वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
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बड़सर और बिझड़ी क्षेत्र में सूखे पेड़ों की संख्या सर्वाधिक है, जिन्हें काटने के लिए विभाग द्वारा मार्क कर लिया गया है। वन निगम अब इन पेड़ों की कटाई शुरू करेगा, जिससे पर्यावरण प्रेमियों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
जिले के लगभग हर उपमंडल में चीड़ के घने जंगल हैं। हर वर्ष फायर सीजन के दौरान लगने वाली आग पेड़ों के सूखने की सबसे बड़ी वजह बन रही है। इसके साथ ही चीड़ से बिरोजे का अवैज्ञानिक दोहन जंगलों की आग को और भयानक बना रहा है। बिरोजा निकालने में केमिकल का प्रयोग और नियमों की अनदेखी आग के फैलाव को बढ़ावा दे रही है। इससे पेड़ों के तने अंदर से खोखले हो रहे हैं और आग पेड़ों के भीतर तक पहुंच रही है, जिससे अन्य प्रजातियों के पेड़ भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
खास बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में जंगलों में आग की घटनाएं अप्रत्याशित रूप से बढ़ी हैं। आग लगने के बाद पेड़ों को सूखने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है और दो बरसात के बाद सूखे पेड़ों की मार्किंग की जाती है। इसी कारण वर्ष 2024-25 की आग का असर अब वर्ष 2025-26 में सूखे पेड़ों के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।


जंगलों में आग की घटनाओं का आंकड़ा
2023-24 : 17 घटनाएं, 97 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित

2024-25 : 264 घटनाएं, 2574 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित
2025-26 : 28 घटनाएं, 226 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित

वर्ष 2024-25 में सूखे पेड़
वन परिक्षेत्र

सूखे पेड़
बिझड़ी

3344
अग्घार

2568

नादौन


578
हमीरपुर

1728

बड़सर

5114


वर्ष 2025-26 में सूखे पेड़
वन परिक्षेत्र

सूखे पेड़

बिझड़ी

5116
अग्घार

8463

नादौन


2656
हमीरपुर

3320

बड़सर

8026



-
जंगलों में आग लगना पेड़ों के सूखने का प्रमुख कारण है। फायर सीजन में बचाव कार्यों में देरी और समाज की सहभागिता का अभाव इसकी बड़ी वजह है। जंगलों से लाभ लेने वालों, विशेषकर बिरोजा ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्षमता से अधिक और केमिकल के जरिये किया जा रहा बिरोजा दोहन आग और पेड़ों के सूखने का कारण बन रहा है। विभाग को निगरानी तंत्र और मजबूत करना होगा। -आचार्य रतन लाल वर्मा, पर्यावरणविद, पर्यावरण समाज एवं नए शोध पुस्तक के लेखक
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हर फायर सीजन में फायर वॉचर तैनात किए जाते हैं। इस बार बारिश कम होने के कारण फरवरी में नियंत्रित तरीके से चीड़ की सूखी पत्तियों का निपटान किया जाएगा। इस बार सभी जंगलों में सूखे पेड़ों की मार्किंग की गई है। बिरोजा दोहन पर भी नियमित निगरानी रखी जा रही है। -अंकित सिंह, डीएफओ हमीरपुर

मैहरे के समीप चीड़ के जंगल में सूखे पेड़। संवाद।

मैहरे के समीप चीड़ के जंगल में सूखे पेड़। संवाद।

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