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उपायुक्त ने व्यक्तिगत तौर पर मेडिकल के छात्रों का बौद्धिक स्तर परखा

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उपायुक्त हमीरपुर हरिकेश मीणा भोरंज स्कूल में कायाकल्प कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में अध्यापकों ? - फोटो : Hamirpur-HP
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भोरंज (हमीरपुर)। उपायुक्त हरिकेश मीणा ने भोरंज शिक्षा खंड के अंतर्गत समस्त राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के प्रधानाचार्यों के साथ वीरवार को कायाकल्प कार्यक्रम के तहत अब तक की प्रगति जानने के लिए समीक्षा बैठक की। कायाकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के मेडिकल तथा नॉन मेडिकल संकाय के जमा एक तथा जमा दो कक्षाओं के छात्राओं को जेईई तथा नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कायाकल्प के अंतर्गत हर माह परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है।
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उसके बाद छात्रों की ओर से अर्जित की गई उपलब्धि के आधार पर मूल्यांकन किया जा रहा है। इस बैठक में भोरंज शिक्षा खंड की 18 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। उपायुक्त ने प्रत्येक स्कूल के छात्रों की कायाकल्प परीक्षा के तहत हासिल अंकों तथा रैंकिंग की विस्तार से जानकारी ली। जिले में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 136 सरकारी व गैर सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के लगभग 7400 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया है। उपायुक्त ने रावमापा भोरंज के नॉन मेडिकल तथा मेडिकल संकाय के जमा एक तथा जमा दो कक्षाओं के छात्र-छात्राओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की तथा उनके बौद्धिक स्तर को परखा। उन्होंने छात्रों को कड़ी मेहनत करने और घर पर अपने अध्ययन के समय को बढ़ाने व प्रगति में निरंतर सुधार करने का सुझाव दिया। उपायुक्त ने कहा कि कुछ स्कूलों के टॉपर छात्रों के प्रदर्शन में कमी आ रही है। बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रधानाचार्य ऐसे स्कूलों के प्रवक्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करें। इस अवसर पर शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर जसवंत सिंह तथा प्रधानाचार्य सुदेश कुमार भी उपस्थित रहे।
उपायुक्त ने इन बातों पर अमल करने को कहा
उपायुक्त ने कहा कि छात्रों का ध्यान अधिकतर पाठ्य पुस्तकों पर केंद्रित करने, उपनिदेशक शिक्षा को नियमित रूप से साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट भेजने, छात्रों से होम वर्क के अतिरिक्त अध्ययन समय को कम से कम 6 घंटे तक बढ़ाने, कायाकल्प के तहत प्रदान किए गए नोट्स को छात्रों को पढ़ाना सुनिश्चित करने, बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रवक्ताओं को स्वयं पढ़कर आने, प्रधानाचार्यों को बच्चों के नोट्स को स्वयं चेक करने, अच्छे नोट्स की प्रति सभी छात्रों को प्रदान करने के निर्देश दिए। इससे सभी बच्चे सही व एक समान अध्ययन कर प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
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