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खून की कमी से माहवारी में होती है दिक्कत, पौष्टिक आहार लें, बहाने से बचें : बिरला

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अपराजिता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्राएं व अधिकारी।(संवाद)
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निजी स्कूल में अमर उजाला अपराजिता-100 मिलियंस स्माइल्स कार्यक्रम में सीडीपीओ ने किया जागरूक
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चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को संतुलित आहार, योगाभ्यास और एनीमिया से बचने के लिए दिए महत्वपूर्ण टिप्स

संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। बाल विकास परियोजना अधिकारी हमीरपुर बलवीर बिरला ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता के लिए लड़कियों का जागरूक होना अति आवश्यक है। इस दौरान लड़कियां पौष्टिक आहार का सेवन करें। सुबह का नाश्ता प्रतिदिन करें और सुबह समय नहीं है, इस बहाने से बचें। बिरला ने शनिवार को दि मैग्नेट पब्लिक स्कूल हमीरपुर में आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के दौरान लड़कियों को जागरूक किया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास परियोजना हमीरपुर का विशेष सहयोग रहा। इस मौके पर स्कूल के प्रधानाचार्य, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. अनामिका, संरक्षण अधिकारी हमीरपुर -2 प्रदीप चौहान, हेल्थ एजुकेटर कमल मनकोटिया विशेष रूप से उपस्थित रहेे। डॉ. अनामिका ने कक्षा नौवीं से जमा दो तक की छात्राओं को मासिक धर्म के बारे में बताया और स्वच्छता के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि आजकल लड़कियों में एनीमिया सामान्य हो गया है। ऐसे में उन्हें मासिक धर्म के दौरान दर्द और अन्य दिक्कतें होती है। इसलिए अपने भोजन में हरी सब्जियां, अंकुरित दालें आदि रोजाना शामिल करें। किशोरावस्था में शरीर में कई परिवर्तन आते हैं। ऐसे में बच्चों को घबराना नहीं है और अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना है। लड़कियों में एनीमिया सबसे ज्यादा पाया जाता है। ऐसे में लड़कियों को अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वहीं, किशोरावस्था में बच्चे स्वस्थ रहने के लिए खेलों को अपनाएं, रोज योग करें, अंकुरित दालें, सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट आदि खाएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। वो दिन योजना और अपराजिता कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को माहवारी के समय स्वच्छता और आहार का किस प्रकार विशेष ध्यान रखना चाहिए, इसकी जानकारी दी जाती है। उन्होंने 100 गोल्डन डेज के विषय में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था से लेकर दो साल तक जच्चा और बच्चा दोनों का ही बड़े ध्यानपूर्वक और सजगता के साथ पालन-पोषण किया जाए तो जीवनभर बीमारियों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। साथ ही डॉ. रिया ठाकुर ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर इस समस्या को महत्व दिया जा रहा है और भारतीय समाज में माहवारी की समस्या से संबंधित कई कुरीतियां के निराकरण के लिए हम सफलतापूर्वक प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वच्छता विषय पर विद्यार्थियों से लिखित रूप में कुछ प्रश्न पूछे गए। इसमें विजेता रहीं छात्राओं को सम्मानित किया गया।

क्या क हती हैं बेटियां

वो दिन योजना और अपराजिता कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को महावारी व स्वच्छता के लिए जागरूक किया जा रहा है। वहीं, जागरूकता शिविरों से सरकारी योजनाओं की सही जानकारी लोगों तक पहुंचती है। केंद्र और प्रदेश सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। साथ ही अन्य लोगों को भी जागरूक करना चाहिए।
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-बलवीर बिरला, सीडीपीओ, हमीरपुर।



कार्यक्रम में ऐसी जानकारी दी गई जो इस आयु में उन्हें काफी सहयोग करेगी। जिन बातों का पूर्व में पता नहीं था, उनके बारे में पता चला। मासिक धर्म के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस बारे में पता चला।

अंशिका, कक्षा जमा दो।





किशोरावस्था हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है। इसलिए हम में जो भी परिवर्तन होना है, उस बारे में सजग होना चाहिए। महावारी को लेकर समाज में कई प्रथाएं हैं। इससे कई प्रथाओं का अंत होगा और लड़कियां भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगी।

अमिता ठाकुर, कक्षा नौवीं।



ऐसे कार्यक्रमों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तथा जीवन में झिझक खत्म होती है। लिए प्रेरणा मिलती है। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन लड़कियों के लिए बहुत फायदेमंद है।
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अक्षांका, कक्षा दसवीं।



इस तरह के कार्यक्रम बेटियों को प्रोत्साहित करते हैं। इससे प्रेरित होकर बेटियां उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। कई बार लड़कियां मासिक धर्म के बारे में बात करने में सजग नहीं होती हैं। ऐसे कार्यक्रमों से पता चलता है कि हमें किस समय कैसे अपनी और दूसरी लड़कियों की सहायता करनी है।

प्रयांशी, कक्षा जमा एक।





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