बस अड़्डा हमीरपुर पर बसों का इंतजार करते यात्री।
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हमीरपुर। यह जिला मुख्यालय का हमीरपुर बस स्टैंड है। सुबह के 11 बजे हैं। बस स्टैंड पर बैठे यात्री हमीरपुर से गलोड, हमीरपुर से धनेटा, हमीरपुर से बिझड़ी समेत बस्सी-भोरंज रूट पर बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन 20 से 40 मिनट का इंतजार करने के बाद भी इन रूटों पर लोगों को बसें नहीं मिल रहीं। कुछ यात्री बस स्टैंड से बाहर सड़क किनारे खड़े होकर किसी परिचित वाहन चालक को देख रहे थे, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में बहुत ही कम लोगों को कुछ रास्ते तक लिफ्ट मिल पाई। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण रूटों पर लोगों को झेलनी पड़ीं।
एचआरटीसी की पीस मील वर्करों की हड़ताल के कारण वीरवार को हमीरपुर डिपो के 35 रूट प्रभावित हुए। जिसमें एक हमीरपुर से लुधियाना का लंबी दूरी का रूट भी शामिल रहा। जबकि शेष सभी लोकल रूट थे। इसके अलावा लंबे समय से पीस मील वर्करों की हड़ताल के कारण डिपो की वर्कशॉप में 32 अन्य बसें भी खड़ी हैं। जिनकी मरम्मत नहीं हो पा रही। डिपो में पीस मील वर्करों की संख्या 39 है, जोकि हड़ताल पर हैं।
जबकि, स्थायी कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है, जिसके चलते बसों का मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं, एचआरटीसी के तकनीकी कर्मचारियों का तर्क है कि अगर शीघ्र यह हड़ताल खत्म न हुई तो वर्कशॉप में बसों की संख्या बढ़ जाएगी। जिससे आने वाले दिनों में अधिक रूटों के प्रभावित होने की संभावना है। वर्कशॉप पर खड़े यात्रियों प्रदीप ठाकुर और अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह गलोड़ जाना चाहते हैं, लेकिन बस न होने के कारण परेशानी हो रही है। इसी तरह सीमा देवी, कुंता देवी, सुनीता और चुनी लाल ने कहा कि वह रंगस रैल के लिए जा रहे हैं, लेकिन काफी इंतजार के बाद एक निजी बस मिली। कुछ लोगों ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर निजी टैक्सियों में सफर किया।