जनजातीय क्षेत्रों में नववर्ष के आगमन पर मनाए जाने वाला धार्मिक पर्व हाल्डा रांगलो घाटी में आरंभ हो गया है। रविवार रात रांगलो के तेलिंग, लालिंग, खरचो, बोगचा, सरखंग, यूरामूर्ति समेत दर्जनों गांव में यह उत्सव मनाया गया।
रात 11 बजते ही ग्रामीणों ने निश्चित स्थान पर लकड़ी की मशाल लेकर एकत्रित हुए। इन मशालों को भूत-प्रेतों को भगाने के लिए जलाया जाता है। ग्रामीणों ने मशालों के साथ जमकर नृत्य भी किया।
कोकसर पंचायत के प्रधान ओम प्रकाश ने बताया कि घाटी में हाल्डा उत्सव का खास महत्व माना जाता है। इस दिन गांव वालों को घरों से बाहर निकलने की मनाही होती है। इस दिन परिवार के सदस्य सुबह से ही परंपरा के तहत नौ प्रकार के व्यंजन पकाते हैं।
सिस्सू पंचायत के पूर्व प्रधान जगदीश कटोच ने बताया कि हाल्डा उत्सव में ग्रामीण रेडियो और टीवी भी नहीं देखते। बताया कि कुल देवता की पूजा अर्चना के बाद ही लोग टीवी देखते हैं। कहा कि चार दिन तक चलने वाले इस पर्व के दौरान गांव-गांव जाकर एक दूसरे को फूल भेंट करते हैं।