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Himachal News: बिजली बोर्ड कर्मियों ने लगाए काले बिल्ले प्रबंधन बोला, कोई भी पद खत्म नहीं किया

Mon, 10 Feb 2025 08:56 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 वर्क टू रूल पर गए कर्मचारियों और अभियंताओं का संयुक्त मोर्चा मंगलवार को हमीरपुर में जिला पंचायत का आयोजन करेगा। 
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हिमाचल बिजली बोर्ड (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बिजली बोर्ड में युक्तिकरण के खिलाफ कर्मचारी और प्रबंधन आमने-सामने आ गया है। एक तरफ कर्मचारियों ने इसके खिलाफ सोमवार को काले बिल्ले लगाकर काम किया तो दूसरी ओर प्रबंधन का दावा है कि बोर्ड में कोई पद खत्म नहीं किया गया है। राज्य बिजली बोर्ड के कर्मियों ने सोमवार को काले बिल्ले लगाकर युक्तिकरण का विरोध किया। वर्क टू रूल पर गए कर्मचारियों और अभियंताओं का संयुक्त मोर्चा मंगलवार को हमीरपुर में जिला पंचायत का आयोजन करेगा। सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने को जिला पंचायत में रणनीति बनाई जाएगी।

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संयुक्त मोर्चा के सह संयोजक हीरालाल वर्मा ने बताया कि सभी कर्मी इन दिनों सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक वर्क टू रूल के तहत ही काम करेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड में युक्तिकरण के नाम पर पद समाप्त नहीं होने देंगे। सरकार बिजली बोर्ड के कर्मियों के साथ धोखा कर रही है। दो साल से बोर्ड में पुरानी पेंशन तक बहाल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बीते दिनों बिजली बोर्ड के निदेशक मंडल ने सरप्लस करीब 700 पदों को समाप्त करने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री की ओर से मंजूरी मिलने के बाद बोर्ड प्रबंधन ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसको लेकर बोर्ड के कर्मचारियों और अभियंताओं के संयुक्त मोर्चा में रोष बढ़ गया है। विरोध स्वरूप बोर्ड कर्मी सोमवार से वर्क टू रूल पर चले गए हैं।

अब सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक ही कर्मी काम करेंगे। सोमवार को बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस शिमला सहित अधिकांश कार्यालयों में कर्मियों ने काले बिल्ले लगाकर विरोध जताया। दूसरी ओर, बिजली बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि कोई भी पद खत्म नहीं किया गया है। गैर जरूरी पदों का समायोजन किया गया है। कर्मचारियों का काले बिल्ले लगाकर प्रदर्शन करना उचित नहीं है। कुछ लोग बोर्ड के कर्मचारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। न किसी पद को समाप्त किया गया है और न ही ऐसी कोई मंशा है। अगर कोई पद समाप्त किया गया है तो कर्मचारी नेता इसकी अधिसूचना दिखाएं।
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प्रवक्ता ने कहा कि बिजली बोर्ड की ऊहल बिजली परियोजना के एक यूनिट ने बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है और जल्द ही बाकी के दो यूनिट में भी बिजली बनना शुरू हो जाएगी। बोर्ड को कर्मचारियों की आवश्यकता है, इसलिए पद समाप्त करने का सवाल ही नहीं पैदा होता। यह परियोजना बोर्ड को आर्थिक संबल प्रदान करेगी इसलिए इस परियोजना के लिए एक नया मंडल तथा अन्य पद सृजित कर इसमें कर्मचारियों का समायोजन किया गया है। बोर्ड की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आने वाले समय में और भर्तियां की जाएंगी।

प्रदेश के लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बोर्ड में टीमेट जैसे फील्ड स्टाफ की आवश्यकता है जो बिजली आपूर्ति करने वाले संस्थान के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड का मुख्य कार्य प्रदेश की जनता को सस्ती दरों पर विद्युत आपूर्ति करना है, जिसके लिए रेगुलेटरी कमीशन बार-बार बिजली बोर्ड को अपने अनावश्यक खर्चे कम करने के लिए आदेश दे रहा है। गैर जरूरी खर्चे कम होंगे तो भविष्य में प्रदेश के लोगों को सस्ती बिजली मिलेगी, जिससे प्रदेश का विकास सुनिश्चित होगा।

 

मुख्यमंत्री का पहला लक्ष्य बिजली बोर्ड और परिवहन निगम को घाटे से उबारना : चौहान
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा है कि सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री का पहला लक्ष्य बिजली बोर्ड और परिवहन निगम को घाटे से उबारना, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना तथा उनमें सुधार करना था और इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए गए। उन्होंने बोर्ड के कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार के आंदोलन में जाने से पहले सरकार से बात करें। सरकार के दरवाजे कर्मचारियों से बात करने के लिए हमेशा खुले हैं। चौहान ने कहा कि बिजली बोर्ड के पास अब कोई प्रोजेक्ट नहीं है।

हिमाचल में पॉवर कारपोरेशन या अन्य प्रोजेक्ट बिजली का उत्पादन करते हैं। जो मुफ्त बिजली मिलती है, उसे बोर्ड को दिया जाता है, जिसे वह आगे सप्लाई करता है।
सोमवार को पत्रकार वार्ता में नरेश चौहान ने कहा कि सरकार को घाटे में चल रहे बिजली बोर्ड को हर वर्ष 2300 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता करनी पड़ी है। बोर्ड को अपने पांवों पर खड़ा करने के लिए ही मुख्यमंत्री ने संपन्न उपभोक्ताओं और उद्योपतियों से सब्सिडी छोड़ने का आग्रह किया और बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी बात को माना। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड के राजस्व व खर्चों में बहुत अंतर है। बोर्ड में इस समय 13 हजार लोग काम कर रहे हैं, जबकि काफी संख्या में पद खाली चल रहे हैं। बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए जेनरेशन विंग और सिविल विंग में बहुत से अतिरिक्त कर्मचारियों अथवा इंजीनियरों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है और उनसे ऑप्शन ली जा रही है, लेकिन युक्तिकरण नीति के तहत पदों को समाप्त करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
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उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी नेता कई बार मुख्यमंत्री से मिले, जिनकी बात को सुना गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली बोर्ड के राजस्व और खर्चों में बहुत अंतर है, इसलिए मुख्यमंत्री की मंशा स्पष्ट है कि बिजली बोर्ड को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए। नरेश चौहान ने कहा कि विधायक प्राथमिकता की बैठक में भाजपा के विधायकों का शामिल न होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की गलत परंपरा आरंभ करने और यह निर्णय लेने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर जिम्मेदार हैं, जिन्होंने अपने विधायकों को इस बैठक में भाग लेने से रोका। जबकि उन्हीं की पार्टी के अधिकतर विधायक इस बैठक में भाग लेने के इच्छुक थे। विपक्ष के नेता का यह आरोप भी निराधार एवं तथ्यों से परे है कि धनराशि के आवंटन में मण्डी जिला से भेदभाव किया गया। इस जिला के हर विधानसभा क्षेत्र को उचित धनराशि उपलब्ध करवाई गई।
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