कोटखाई के चैथला गांव में मशीन से काटने के बाद सेब के पेड़ को गिराते हुए।
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कोटखाई के चैथला गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद, वन विभाग ने पहली बार बड़े बागवानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इससे पहले केवल छोटे बागवानों पर ही कार्रवाई होती रही थी, जबकि प्रभावशाली व बड़े स्तर पर कब्जा करने वाले लोगों पर कार्रवाई वर्षों से टलती रही।
गौरतलब है कि यह मामला बीते लगभग चार वर्षों से न्यायालय में लंबित था और बीच-बीच में निशानदेही आदि की प्रक्रिया चलती रही, जिससे कार्रवाई में देरी हुई। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके बाद अब जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। वहां भी कई जगहों पर वन भूमि पर कब्जों की शिकायतें सामने आई हैं।
हाईकोर्ट की इस सख्ती से साफ है कि अब अतिक्रमण को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे कब्जा किसी छोटे किसान ने किया हो या किसी बड़े बागवान ने। यह कार्रवाई आने वाले समय में अन्य मामलों के लिए भी नजीर बन सकती है। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र के लोगों के हथियार भी जमा करवा लिए हैं।
वहीं, कुमारसैन की ग्राम पंचायत बड़ागांव के सराहन गांव में
हाईकोर्ट के आदेश के बाद वन भूमि पर सेब के बगीचों पर भी कार्रवाई की गई। सेब, नाशपाती और चेरी के करीब 320 पेड़ काटे गए। सराहन के चार लोगों के सेब के बगीचों में पौधे काटे गए। वहीं अन्य बचे लोगों पर 14 जुलाई को कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। एक मकान को भी कब्जे में लिया गया है।
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