कर्मचारी संगठनों ने एनपीएस और ओपीएस कर्मचारियों के डीए में अंतर का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि एनपीएस कर्मचारियों को केंद्रीय दरों के अनुरूप डीए मिल रहा है, जबकि ओपीएस कर्मचारियों को लंबित डीए के कारण कम दर पर भुगतान किया जा रहा है। इससे सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के ग्रेच्युटी समेत अन्य वित्तीय लाभों पर भी असर पड़ने का दावा किया जा रहा है। आम सभा में डीए, एरियर भुगतान और सेवानिवृत्ति लाभों में डीए की गणना के मुद्दे पर चर्चा होगी। इसके बाद सरकार को ज्ञापन देने और आंदोलन की रणनीति तय की जा सकती है। संगठनों ने वेतन और पेंशन भुगतान की तारीख में बदलाव तथा पुरानी देनदारियों को आगे खिसकाने पर भी चिंता जताई है।
भविष्य में डीए फ्रिज होने की आशंका
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने कहा कि प्रदेश में डीए का एरियर करीब 5300 करोड़ रुपये हो चुका है। भविष्य में सरकारें इसका भुगतान नहीं कर पाईं तो डीए फ्रिज होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को वेतन कटौती की भी आशंका है। उनके अनुसार मौजूदा समय में 15 फीसदी डीए लंबित है और केंद्र की ओर से तीन फीसदी डीए और बढ़ाए जाने के बाद यह अंतर 18 फीसदी हो जाएगा। सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के वित्तीय लाभ निचले डीए पर तय होने को उन्होंने भेदभाव बताया।
मिलकर लड़ेंगे डीए की लड़ाई
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी कर्मचारी और पेंशनर संगठन मिलकर लंबित डीए की लड़ाई लड़ेंगे। कर्मचारी संगठनों के साथ शुरुआती चर्चा हो चुकी है और शिमला में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि डीए कर्मचारियों और पेंशनरों का कानूनी हक है। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति लगातार मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है और अब संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी जाएगी।
सचिवालय महासंघ देगा साथ
प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मियां ने कहा कि डीए की मांग को लेकर संयुक्त रूप से जो भी फैसला होगा, महासंघ उसमें पूरा साथ देगा। अगले सप्ताह शिमला में कर्मचारियों और पेंशनरों की आम सभा बुलाने की तैयारी है। इसके लिए पूरे हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों को खुला न्योता दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीए वेतन का अहम हिस्सा है और इसे लेकर सरकार की देरी से कर्मचारी नाराज हैं।