देश के साथ हिमाचल प्रदेश में भी आज दिवाली का त्योहार पूरे धूम धाम से मनाया जा रहा है। सुरक्षित दिवाली मनाने के लिए प्रशासन ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है, ताकि दिवाली की खुशियों में किसी तरह का खलल न पड़े। डीसी शिमला आदित्य नेगी ने लोगों को दिवाली पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि शहर में लोग रात आठ से 10 बजे तक पटाखे जला सकते हैं। उन्होंने लोगों को सुरक्षित दिवाली मनाने का आह्वान किया।
पटाखे जलाते समय बरतें ये सावधानी
दो या तीन व्यक्ति मिलकर पटाखे चलाएं ताकि हादसे की स्थिति में दूसरे की मदद हो सके।
मोमबत्ती या फिर अगरबत्ती से ही पटाखों को उचित दूरी पर रखकर जलाएं
बड़ों की देखरेख में पटाखों का चलाएं
घर के बाहर खुले में मनाएं दिवाली
पुराने शहर में खास सावधानी बरतें
पार्किंग, वाहनों के पास बम न फोड़े
अस्पतालों से दूरी बनाकर पटाखे करें
पटाखों को सड़क पर या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं जलाएं
पटाखों को हाथ में पकड़ कर न जलाएं। जमीन पर रखकर जलाएं
जलाने के बाद अगर पटाखा न जले तो उस पर पानी डाल दें।
पटाखों के भंडार को पटाखे जलाने के स्थान के पास न रखें।
छोटे बच्चों को स्वयं पटाखे जलाने को न दें।
पटाखों पर झुककर उन्हें न जलाएं, डिब्बे या कांच की बोतल में रखें
ढीले वस्त्र न पहनें और जलते पटाखे किसी व्यक्ति पर न फेंके
पटाखे से चोट यह बरतें सावधानियां
पटाखों से चोट लगने पर प्राकृतिक रूप से पलकें स्वयं बंद हो जाती हैं। इन्हें बंद ही रहने दें। जलन, दर्द और छटपटाहट होने पर घबराएं नहीं। दर्द निवारण के लिए दर्द निवारक टेबलेट ले सकते हैं। आंखों को धोएं नहीं। अपनी या किसी दूसरे की सलाह पर नेत्रों में दवा डालने का प्रयास न करें।
गर्भवती महिलाएं रखें खास ख्याल
शिमला। गर्भवती महिलाएं जिन्हें सांस की समस्या हो उन्हें प्रदूषण से दूर रहना चाहिए। खासकर यदि किसी महिला को अस्थमा है तो उन्हें हर वक्त अपने साथ इनहेलर रखना चाहिए। एलर्जी के खतरे को कम करने के लिए जब तक संभव हो सजावट की फूलमालाएं आदि को घर से बाहर ही रखें। पटाखों से फैले प्रदूषण से भी बचकर रहना चाहिए। यह प्रदूषण पेट में पल रहे मासूम के लिए ठीक नहीं। वातावरण से जो कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के जरिये लेंगी वह शरीर में आक्सीजन के उपयुक्त संचरण में बांधा पहुंचाते हैं।
यह हानिकारक गैस भ्रूण के प्लेसेंटा से होकर गुजरे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। अक्सर महिलाएं त्योहार की तैयारियों में व्यस्त होकर भोजन के प्रति लापरवाही कर जाती हैं। इन्हें थोड़ी मात्रा में 1 से 2 घंटे के अंतराल पर पौष्टिक भोजन ग्रहण करना चाहिए। संभव हो तो हर घंटे में पानी-पीते रहना चाहिए। ऐसा करने से चक्कर आने की समस्याएं बेहोशी और सुस्ती से आप खुद को बचा सकती हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि आतिशबाजी के दौरान गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें।