एक वर्ष से इस पर शोध चल रह था, जो सफल रहा
पिछले एक वर्ष से इस पर शोध चल रह था, जो सफल रहा है। ढिंगरी मशरूम अपने स्वाद और बेहतरीन औषधीय व पौष्टिक गुणों के लिए जानी जाती है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। बेहतरीन स्वाद और गुणों के कारण देश-विदेश के बड़े होटलों और रेस्टोरेंट में इसकी मांग रहती है। बाजार में ढिंगरी मशरूम का दाम 100 से 200 रुपये प्रति किलो तक रहता है। देश में बटन मशरूम के बाद दूसरे स्थान पर सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली प्रजाति ढिंगरी मशरूम ही है। भारत में हर साल 3,010 मीट्रिक टन से अधिक मशरूम तैयार की जाती है, जिससे लगभग 4 अरब रुपये से अधिक का कारोबार होता है। अकेले हिमाचल प्रदेश में करीब 2 करोड़ का कारोबार किया जाता है।
ढिंगरी पर एनआरसीएसएस अजमेर के साथ भी चल रहा शोध
अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों की ओर से पहले औषधीय पौधों के अपशिष्टों पर ढिंगरी मशरूम उगाने का सफल प्रशिक्षण किया जा चुका है। इसमें अदरक और तुलसी पर सफल शोध रहा है। इसमें 28 से 32 दिन बाद क्रॉप आई थी। वहीं, इसमें खुंब अनुसंधान निदेशालय की ओर से मसालों के अपशिष्टों पर ढिंगरी मशरूम उगाने का शोध किया जा रहा है। लोगों को मशरूम खाने के साथ प्रोटीन ही नहीं, बल्कि जीरा, सौंफ और धनिया के औषधीय गुण भी मिलेंगे। इसका शोध डीएमआर के विशेषज्ञ एनआरसीएसएस (राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र) अजमेर के साथ कर रहे हैं। सफल शोध के बाद इसका प्रशिक्षण देशभर के मशरूम उत्पादकों और किसानों को भी दिया जाएगा।
ढिंगरी मशरूम का हाईब्रिड बीज तैयार करने में विशेषज्ञों को सफलता मिली है। आठ दिन में आई क्रॉप पहले वाली तकनीक से दो गुना अधिक आई है। यह शोध एक वर्ष बाद पूरा हुआ है। पहली बार इस नई पिंक प्रजाति और हाईब्रिड बीज के बारे में राष्ट्रीय खुंब मेले में देशभर के मशरूम उत्पादकों के लिए इसे प्रदर्शित किया जाएगा। - डॉ. ब्रिज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक, डीएमआर