याचिकाओं में बताया गया है कि संविधान के तहत सरकार को सिर्फ भूमि पर राजस्व लगाने का अधिकार है, लेकिन राज्य सरकार पूरे प्रोजेक्ट के बाजार मूल्य पर भू-राजस्व लगा रही है, जो असांविधानिक है। यह संशोधन हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम 1954 और भारतीय संविधान के प्रावधान के विपरीत है। मांग की गई है कि सरकार को भू-राजस्व की वसूली से रोका जाए।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भू-राजस्व लगाने का मकसद सालाना करीब 1800-2000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाना है। भू-राजस्व 191 परियोजनाओं पर लागू होगा। इनमें सबसे अधिक 45 प्रोजेक्ट चंबा हैं, जबकि कुल्लू में 35 हैं। राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति के बीच आरडीजी होने के बाद राजस्व के नए स्रोत पैदा करने के लिए यह फैसला लिया गया है।