मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ग्रामीण हिमाचल के समग्र विकास में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभाग में खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। आने वाले समय में नई भर्तियां की जाएंगी। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, सचिव सी पालरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहें।
राज्य में निर्माणाधीन पंचायत घरों को पूरा करने के लिए सरकार 30 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। ऊना में बन रहे जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण कार्य के लिए भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए शिमला में हिमाचल हाट का निर्माण किया जा रहा है। पंडोह और कुल्लू में भी शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उन्हें फूड वैन भी उपलब्ध करवाई गई हैं। भविष्य में ऐसी और वैन भी प्रदान की जाएंगी। उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव को सभी प्रमुख योजनाओं को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ने के निर्देश भी दिए।
हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के निदेशालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत स्थायी प्रतीक्षा सूची को अंतिम रूप देने के लिए आवास प्लस सिस्टम में पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल शुरू किया है। यह कदम केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार उठाया गया है। यह मॉड्यूल ग्राम सभाओं को सिस्टम द्वारा तैयार प्राथमिकता सूची की समीक्षा करने की सुविधा देगा। ग्राम सभाएं लाभार्थियों के विवरण को सत्यापित कर सकेंगी। वे निर्धारित पात्रता और प्राथमिकता मापदंडों के आधार पर आवश्यक संशोधनों की सिफारिश भी कर सकेंगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक संशोधन का कारण प्रणाली में दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस मॉड्यूल में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं। इनमें ग्राम सभा की जियो-टैग्ड और समयांकित फोटो अपलोड करने की सुविधा है। कार्रवाई का प्रारूप भी उपलब्ध होगा। पंचायती राज संस्थाओं के हस्ताक्षर और मुहर की व्यवस्था भी की गई है। इसके अतिरिक्त, दस्तावेज का एआई आधारित सत्यापन जैसी सुविधाएं भी इसमें उपलब्ध हैं। ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित सूची में शामिल न किए गए पात्र परिवार अपील कर सकेंगे। वे निर्धारित प्रावधानों के अनुसार जिला स्तरीय अपीलीय समिति के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत कर सकते हैं। ग्रामीण विकास निदेशालय ने सभी उपायुक्तों, जिला विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों से इस प्रक्रिया को 10 जुलाई 2026 तक पारदर्शी ढंग से पूरा करने को कहा गया है।