फयुल समाचार की रिपोर्ट में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के हवाले से कहा गया है कि तिब्बत में विशेष रूप से निर्वासित लोगों पर नजर रखी गई। विभिन्न हिस्सों में गिरफ्तारियां हुईं हैं। 200 तिब्बतियों से परम पावन के जन्मदिन समारोहों से जुड़े होने के संदेह में पूछताछ की गई। करजे मठ में पुलिस की भारी तैनाती हुई, जिससे भिक्षुओं और भिक्षुणियों को मठ परिसर तक सीमित रखा गया। उन्हें सामुदायिक समारोह में भाग लेने से रोका गया। अधिकारियों ने घरों में धूपबत्ती जलाने और जुनिपर जलाने जैसे संगसोल अनुष्ठानों में शामिल होने पर भी सख्त नियम लागू किए।
करजे के ड्राकगो काउंटी में 23 जुलाई तक सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध की घोषणा थी। कई तिब्बतियों को पारंपरिक अमदो प्रांत के बा जोंग और सिलिंग (च. शिनिंग) में गिरफ्तार किया गया। कुछ को काउंटीस्तरीय राज्य सुरक्षा केंद्रों में हिरासत में रखा गया। गिरफ्तार लोगों के परिवारों को कोई जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं निजी जन्मदिन समारोहों की तस्वीरें सार्वजनिक सुरक्षा कार्यालयों में जमा करने का निर्देश दिया गया। घरों में आध्यात्मिक नेता की छवियों को रखने या प्रदर्शित करने पर रोक लगाई। तिब्बत की राजधानी ल्हासा और माल्ड्रोगुंगकर समेत पूरे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में काफी अधिक संख्या में सशस्त्र सुरक्षा बल तैनात रहे।