धरवाला (चंबा)। अगस्त और सितंबर में प्राकृतिक आपदा आई और गहरे जख्म देकर गुजर गई, लेकिन इसके जख्म भरना शासन-प्रशासन पूरी तरह से भूल चुका है। ऐसे ही हालात धरवाला-लिल्ह मार्ग के बने हुए हैं। आपदा के दौरान पूरी तरह से जमींदोज हो चुके मार्ग से मिट्टी हटाकर महज रास्ता तैयार किया गया। इसके बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
चार किलोमीटर के इस मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं। जिस कारण किलोड़, कुनेड़, प्रीणा, गाण और गुराड़ पंचायतों की पांच हजार की आबादी जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए विवश है। यहां पर चालक की जरा भी चूक बड़े हादसे की वजह तक बन सकती है।
पंचायतों से विद्यार्थी मॉडर्न डिग्री कॉलेज और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लिल्ह के लिए आवाजाही करते हैं। सड़क के किनारे पैरापिट का कोई भी नामोनिशान तक नहीं हैं।
प्राकृतिक आपदा के बाद शासन-प्रशासन की ओर से इस मार्ग की सुध लेना जरूरी नहीं समझा है। इसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। संजय ठाकुर, लिल्ह, निवासी
सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। इसकी मरम्मत करवा कर सुरक्षात्मक प्रयास करने को लेकर कोई भी प्रयास अभी तक नहीं हो पाए हैं। ओम प्रकाश कालिया, लिल्ह निवासी
धरवाला-लिल्ह मार्ग किलोड़, कुनेड़, प्रीणा, गाण और गुराड़ को जोड़ता है। रास्ते पर जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं। जिस कारण बड़े हादसे का ही भय बना रहता है। रमन ठाकुर, लिल्ह निवासी
प्राकृतिक आपदा के जख्म भरने को शासन-प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं हो पाएं हैं। जिस कारण लोग आज भी जान जोखिम में डाल कर खस्ताहाल मार्ग पर सफर को विवश है। पवन ठाकुर, लिल्ह निवासी
धरवाला-लिल्ह मार्ग पर तारकोल बिछाने का प्राकलन तैयार कर मंडल कार्यालय भरमौर भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलने पर धरवाला-लिल्ह मार्ग पर तारकोल बिछाने का कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा। राकेश मरोल, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग उपमंडल राख