धरने के दौरान कुठेड प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के कामगार।
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चंबा। जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत ठेकेदार कामगारों को समय पर वेतन सहित अन्य भत्ते नहीं दे रहे हैं। कामगारों के लिए टनल के अंदर और बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसी के चलते मंगलवार को सीटू पदाधिकारियों ने कामगारों के साथ गेट मीटिंग कर आगामी रणनीति बनाई।
सीटू जिला सचिव सुदेश ठाकुर और अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि भरमौर-होली में निजी जलविद्युत परियोजनाओं की ओर से काम ठेकेदार पर दिया गया है।
आरोप लगाया कि परियोजनाओं में श्रम कानूनों को लागू नहीं किया जा रहा है। इससे मजदूर वर्ग का शोषण हो रहा है। सीटू संबंधी यूनियन कुठेड़ प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन ने मजदूरों की मांगों को कई बार कंपनी प्रबंधन के समक्ष लिखित रूप में उठाया। साथ ही उनके साथ वार्ता भी की लेकिन, अधिकांश मांगें नहीं मानी गई हैं। मजदूरों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। उनके लिए बोनस, वेतन वृद्धि और सुरक्षा प्रबंध पुख्ता नहीं हैं। इस कारण एक मजदूर अपनी जान तक गवां चुका है। कहा कि तीन माह से कार्यस्थल पर फार्मासिस्ट और स्थायी एंबुलेंस की मांग की जा रही है। लेकिन, कंपनी सकारात्मक कदम नहीं उठा पाई है। मजदूरों को कार्यस्थल से आवाजाही के लिए पर्याप्त वाहन सुविधा नहीं है। कार्यस्थल पर श्रमिकों के लिए सेफ्टी शूज और जैकेट तक नहीं हैं। कहा कि 30 अगस्त को परियोजना में कार्यरत दो मजदूरों की कार दुर्घटना में मृत्यु हुई थी।
दोनों के परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। लिहाजा, दोनों परिवारों को आर्थिक मदद के तौर पर 25-25 लाख रुपये प्रदान किए जाएं और महीने न्यूनतम मजदूरी दर के आधार पर सहायता राशि दी जाए। कहा कि मंगलवार को इसी के चलते गेट मीटिंग की गई। मांगें पूरी न होने पर बड़ी हड़ताल की जाएगी, जिसके लिए कंपनी प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
इन्हीं मांगों को लेकर मंगलवार को 26 तारीख से परियोजना में गेट मीटिंग से आंदोलन की शुरुआत कर दी है और उसको बढ़ाते हुए आने वाले समय में बड़ी हड़ताल की जाएगी। गेट मीटिंग के दौरान कुठेड़ प्रोजेक्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष अलॉट-1 सोभन नरेश, अलॉट-2 अध्यक्ष जीवन और सचिव विवेकी ने श्रमिकों को संबोधित किया।