चंबा। सूही माता के प्रतीक की आंखों में आंसू देखकर सब लोग स्तब्ध रह गए। वीरवार देरशाम सूही मढ़ से ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा पहने गद्दी समुदाय की महिलाएं घुरेई गायन करते हुए माता की शोभायात्रा पिंक पैलेस लाई गई। इसके साथ ही तीन दिवसीय ऐतिहासिक सूही मेला भी संपन्न हो गया। चंबा की रानी सुनयना की याद में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक सूही मेला 11 अप्रैल से शुरू होकर 13 अप्रैल तक धूमधाम के साथ मनाया गया।
चंबा रिसायत के लोगों की प्यास बुझाने के लिए चंबा की रानी सुनयना ने अपने प्राणों की आहुति दी थी जिसके बाद चंबा में पानी की कमी दूर हो गई। रानी सुनयना की याद में हर वर्ष सूही जातर मेला मनाया जाता है। इसी क्रम में मंगलवार को चंबा के ऐतिहासिक पिंक पैलेस से पूजा-अर्चना के बाद माता सुनयना के प्रतीक को पालकी के जरिये सूही मढ़ पहुंचाया गया। दूसरे दिन रानी के समाधि स्थल मलूड़ा को सूही मढ़ से ढोल-नगाड़ों की थाप पर जातर ले जाई गई। तीसरे दिन दोपहर के समय सूही मढ़ में भंडारे का आयोजन किया गया। साथ ही देरशाम सूही मढ़ से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद माता के चिह्न को पालकी में रखकर पिंक पैलेस लाया गया। मेले के दौरान राजनौण के पास कई अस्थायी दुकानें लगती हैं जहां पर लोग खट्टे पकौडू, पापड़, खट्टे राजमा चावल सहित अन्य व्यंजनों का स्वाद चखते हैं।