चंबा के सत्संग भवन मुगला में सत्संग सुनते अनुयायी।संवाद
चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में रविवार को सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान महात्मा अरुण महाजन ने संगत से कहा कि समदृष्टि का अर्थ समान दृष्टि है। इसमें द्वैत की भावना नहीं होती। मन और शरीर से कभी मानव एक नहीं हो सकता, लेकिन आत्मिक रूप से मानव एक ही है।
हमारे पीर पैगंबर और हमारे मान्य धर्म ग्रंथ किसी भी प्रकार के पक्षपात की आज्ञा नहींं देते। फिर भी सर्वत्र पक्षपात पूर्ण व्यवहार देखने को मिलता है। ईश्वर ने तो आंखों को एक जैसी दृष्टि दी है, हमारी सोच हमारी भावनाओं में क्यों अंतर आ जाता है।
समदृष्टि वास्तव में सत्गुरु की कृपा से आती है। जब एक जिज्ञासु के जीवन में ब्रह्म ज्ञान द्वारा निरंकार से आत्म सात हो जाता है, तब उसे पूरी कायनात में परमात्मा के ही दर्शन होने शुरू हो जाते है।
वह वनस्पति, पहाड़ जीव-जंतु हर एक जीवित प्राणी में परमात्मा के दर्शन करना शुरू हो जता है उसका किसी के साथ वैर-विरोध नहीं होता वह निरवैर हो जाता है, उसके मन से द्वैत की भावना खत्म हो जाती है। सत्संग के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें समस्त निरंकारी अनुयायियों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। सहायक प्रबंधक विनोद कुमार ने बताया कि सत्संग में साहो, जडेरा, मंगला, राखा, जांघी, मैहला, धरवाला, मुगला और हरदासपुरा से निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। सत्संग का शुभारंभ आरती वंदना से किया गया।