चंबा। जिले में रविवार से हो रही लगातार भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार को भी बारिश ने थमने का नाम नहीं लिया। जिले में सड़कें, बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया है।
जिलेभर में भूस्खलन और मलबा गिरने से भरमौर-पठानकोट हाईवे सहित 239 सड़कें यातायात के लिए बंद पड़ी हैं। परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है और लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। जांघी, कांधू, हरोता, केरू का पहाड़ और बनीखेत के पास फिर हाईवे भूस्खलन के चलते बंद है। लगातार बारिश ने बिजली और पानी की सप्लाई पर भी असर डाला है। 207 ट्रांसफार्मर ठप पड़ने से 1250 गांव अंधेरे में डूब गए हैं। वहीं, 100 पेयजल योजनाएं बंद होने से लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। बारिश और भूस्खलन के चलते मोबाइल नेटवर्क भी ठप हो गया है। लोगों के मोबाइल में सिर्फ कॉलिंग सुविधा ही चल रही है, जबकि इंटरनेट पूरी तरह से बंद है। इससे दफ्तरों के साथ लोगों के कई जरूरी काम भी रुक गए हैं।
सुल्तानपुर वार्ड में तबाही
चंबा नगर परिषद के वार्ड सुल्तानपुर में मंगलवार को उफान पर आए नाले ने कहर बरपाया। नाले के मलबे में छह वाहन दब गए, जबकि 10 से 15 घरों में पानी और मलबा घुस आया। कई परिवारों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। उधर, मंगलवार शाम को सुल्तानपुर वार्ड में डीसी मुकेश रेपसवाल ने मौके पर पहुंच कर हालत का जायजा लिया।
प्रशासन के लिए चुनौती
बंद पड़ी सड़कें, ठप बिजली-पानी की व्यवस्था और नेटवर्क सेवाओं के रुकने से प्रशासनिक तंत्र चौतरफा दबाव में है। राहत और बहाली का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश दिक्कतें बढ़ा रही है।
ऑनलाइन क्लासें बंद
मोबाइल नेटवर्क ठप होने से इंटरनेट सुविधा पूरी तरह से बंद हो गई है। विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित है।
गांवों में पानी की मारामारी
100 पेयजल योजनाएं बंद होने से ग्रामीणों को पानी के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दूरदराज से पानी लाना पड़ रहा है।
अंधेरे में गांव
जिले में 207 ट्रांसफार्मर बंद होने से 1250 गांव अंधेरे में डूब गए हैं। इससे ऑनलाइन शिक्षा तो दूर लोग मोबाइल चार्ज नहीं कर पा रहे हैं। घर में खाना बनाना मुश्किल हो रहा है।
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