निजी स्कूल एसोसिएशन बोली- हर वर्ष दाखिला शुल्क लेने के आरोप निराधार
ट्यूशन फीस में की जाती है 5 से 10 प्रतिशत की सामान्य बढ़ोतरी : अनिल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। इरावती में निजी स्कूल एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता कर निजी स्कूलों में हर वर्ष दाखिला शुल्क लेने के आरोपों को निराधार बताया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अभिभावकों के बीच निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, विशेषकर फीस वृद्धि और पुन: प्रवेश शुल्क को लेकर चल रहीं भ्रांतियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि चंबा के किसी भी निजी स्कूल में री-एडमिशन फीस नहीं ली जाती है। प्रवेश शुल्क केवल तभी लिया जाता है जब बच्चा पहली बार स्कूल में दाखिला लेता है। उन्होंने स्कूलों के खर्चों और वार्षिक शुल्क पर भी चर्चा की। उन्होंने एसोसिएशन की ओर से घोषणा की कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिले के सभी निजी स्कूल नोटिस बोर्ड पर पिछले और वर्तमान वर्ष का फीस ढांचा चस्पा करेंगे।
उन्होंने बताया कि स्कूलों को हर साल शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करनी होती है। यह खर्च वहन करने के लिए ट्यूशन फीस में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की सामान्य बढ़ोतरी की जाती है। वार्षिक शुल्क का उपयोग स्कूल की बिल्डिंग के रखरखाव, बिजली-पानी के बिल, सफाई व्यवस्था और बच्चों को दी जाने वाली आधुनिक सुविधाओं पर किया जाता है। एसोसिएशन से डॉ. संजीव सूरी ने कहा कि दूरदराज के जिले में निजी स्कूल बहुत कम लाभ पर शिक्षा दे रहे हैं। अन्य जिलों या राज्यों की तुलना में चंबा के निजी स्कूलों की फीस काफी कम है। बढ़ती महंगाई के दौर में स्कूलों को सुचारू रूप से चलाने के लिए न्यूनतम शुल्क वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि किसी अभिभावक को फीस या स्कूल की कार्यप्रणाली से संबंधित कोई शिकायत है तो स्कूल प्रबंधन या एसोसिएशन से संपर्क कर सकते हैं। डॉ. सूरी ने कहा कि निजी स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को बेहतरीन शिक्षा और सुविधाएं देना है।