चंबा। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के निजीकरण और विघटन को लेकर विरोध के स्वर उठने आरंभ हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद पेंशनर संघ की शाखा चंबा का प्रतिनिधिमंडल महासचिव मुकेश बेदी की अध्यक्षता में सदर विधायक नीरज नैयर के माध्यम से संसदीय सचिव से मिला और उन्हें मांगपत्र सौंपा।
राज्य विद्युत परिषद पेंशनर संघ की शाखा चंबा के महासचिव मुकेश बेदी, बुधिया राम, दलीप चौणा, निक्कू राम दुनेरिया, मदन लाल, विजय सिंह कटोच, हरदेश बत्ता, बीएम महाजन और आत्मा राम ने पुरानी पेंशन बहाली पर प्रदेश सरकार का आभार जताया। कहा कि बिजली बोर्ड को चार परियोजना हेल (18 मेगावाट), देवीकोठी (16 मेगावाट), सेईकोठी (15 मेगावाट) और सेईकोठी-द्वितीय (16.15 मेगावाट) आवंटित हुई थी। उन्हें एचपीपीसीएल को देने की प्रक्रिया जोरों पर है। बताया कि इन परियोजनाओं को एचपीपीसीएल को सौंपने से काफी नुकसान होगा। बताया कि परियोजनाओं संबंधी सारी मंजूरियां हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की ओर से अपने नाम पर ली गई हैं। उन्हें एचपीपीसीएल को स्थानांतरित करने में बहुमूल्य समय जाया होगा। इससे विद्युत उत्पादन देरी से होगा जिसका नुकसान करोड़ों में होगा। केएफडब्ल्यू से इन परियोजनाओं को 80 मिलियन यूरो का ऋण प्रदान करने के लिए अनुबंध हो चुका है। इसको एचपीपीसीएल के नाम पर करना होगा जिसकी संभावना बहुत कम है। एचपीपीसीएल इन परियोजनाओं को किसी और संस्था से वित्तपोषित करवाता है तो दो-तीन साल का समय इस चरण तक पहुंचने में लगेगा। इसका नुकसान भी करोड़ों में होगा। एचपीएसईबीएल पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन ने जलविद्युत परियोजनाओं को एचपीपीसीएल को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का विरोध किया और इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है।