बस स्टैंड के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। सोमवार को जनहित संगठन ने प्रेस वार्ता कर बताया कि नए बस स्टैंड के उद्घाटन समारोह में संगठन के सभी सदस्य काले बिल्ले लगाकर विरोध दर्ज करेंगे।
सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक योग राज महाजन ने कहा कि जिला प्रशासन सरकार की कठपुतली बनकर बस स्टैंड को जेल के पास स्थानांतरित कर रहा है। जबकि यहां पर बस स्टैंड के नाम पर चारदीवारी ही बनाई गई है। वहां पर यात्रियों की सुविधा के लिए कोई भी प्रबंध नहीं किए गए हैं। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से भी बस स्टैंड का निर्माण करना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रावधानों के अनुसार नदी के पचास मीटर के दायरे में किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए असुरक्षित स्थान पर बस स्टैंड का निर्माण कर रही है।
जनहित संगठन के संयोजक शादी लाल शर्मा ने बताया कि नए बस स्टैंड में मात्र आठ बसों के ठहरने की व्यवस्था है जबकि चंबा में निजी व सरकारी बसों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। जेल के पास बस स्टैंड शिफ्ट होने से लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि जनहित संगठन ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में नए बस स्टैंड को लेकर याचिका दायर कर दी है। अगर वहां से संतोषजनक फैसला नहीं हुआ तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा जिसकी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी। शहर में दुकानदार खाद्य वस्तुओं को मनमाने दामों पर बेच रहे हैं लेकिन वहां पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करता। उन्होंने कहा कि जीरो प्वाइंट पर नए बस स्टैंड का निर्माण करना चाहिए। जो कि सुरक्षा व लोगों की सहूलियत की दृष्टि से बिल्कुल सही है।
जनहित संगठन के सदस्य पंडित देवी प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि पुरातत्व विभाग के सामने जेल के ऐतिहासिक भवन को उखाड़ दिया गया लेकिन विभाग द्वारा कोई भी कार्रवाई देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि रावी नदी के ऊपर तीन डैम बन चुके है। उनमें से एक भी डैम क्षतिग्रस्त होता है, तो नए बस स्टैंड का नामोनिशान मिट जाएगा। मुख्यमंत्री बस स्टैंड का उद्घाटन करने के चक्कर में जबरन पुराने बस स्टैंड को शिफ्ट करवा रहे हैं।