चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी में 33 केवी बिजली की लाइन को बिछाने का कार्य प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही के कारण ठप पड़ा है। इसकी वजह से घाटी के हजारों लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसलिए इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यह मांग भरमौर विधायक डॉ. जनक राज ने विधानसभा के शून्यकाल में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से की।
इस मामले के संबंध में उन्होंने एक लिखित पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा। इसमें उन्होंने बताया है कि इस परियोजना को आवश्यक वन स्वीकृति प्राप्त किए बिना आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कार्य को बीच में ही रोकना पड़ा। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है बल्कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर भी गंभीर प्रश्न चिह्न भी खड़े करती है। इससे राज्य सरकार की कार्यप्रणाली एवं छवि भी प्रभावित होना स्वाभाविक है।
यदि इस परियोजना के लिए पूर्व में ही विभिन्न मदों के अंतर्गत वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की जा चुकी थीं, तो उसे नियमों के अनुरूप, समयबद्ध एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित करना राज्य सरकार एवं संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है।
परियोजना के प्रारंभिक चरण में ही वन स्वीकृति जैसी अनिवार्य औपचारिकताओं को पूर्ण न करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। अपनी जवाबदेही से बचने के लिए विभागीय अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इसलिए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच तत्काल करवाई जाए। जिन अधिकारियों/विभागों की लापरवाही या नियम उल्लंघन के कारण यह परियोजना बाधित हुई है, उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उधर, वन मंडल अधिकारी पांगी रवि गुलेरिया ने बताया कि 33 केवी लाइन से संबंधित जरूरी दस्तावेज बोर्ड से मांगे गए हैं, जिन्हें उपलब्ध करवाने के उपरांत इस कार्य को वन विभाग की तरफ से कोई आपत्ति जाहिर नहीं की जाएगी।