चनेड़ (चंबा)। राजकीय उत्कृष्ट विद्यालय उदयुपर में शिक्षा संवाद के साथ अभिभावकों और अध्यापकों की बैठक हुई। इस दौरान प्रधानाचार्य भरत भूषण ने कहा कि मां की गोद शिशु की प्रथम पाठशाला होती है। माताएं अपने बच्चों को जैसा सिखाएंगी बच्चों वैसा ही सीखेंगे।
बच्चों को सुबह नहलाकर तैयार करके स्कूल भेजने की जिम्मेदारी माताओं की है। संतान ने बड़ा कोई धन नहीं। बच्चों को अच्छी शिक्षा दीक्षा देकर अच्छा बनाने में अभिभावकों की पहली भूमिका होती है। उन्हाेंने कहा कि स्कूल में नामांकन के बाद नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। अभिभावक हर सप्ताह स्कूल आएं और कक्षा व विषय अध्यापक से संपर्क कर अपने बच्चे की प्रगति और शिक्षा स्तर के बारे में जानकारी प्राप्त करें। दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार अलग से प्रयासरत है।
बैठक में अभिभावकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई। अभिभावकों को बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उनके कक्षा कार्य और गृह कार्य की कापियां रोज देखने की जिम्मेदारी दी गई। डीबीटी के बारे में अभिभावकों के सवालों के जवाब भी दिए गए। बैठक में 50 अभिभावक मौजूद रहे। इस दौरान सहायक अध्यापक सुरेश कुमार और कामनी शर्मा आदि मौजूद रहीं।